हरियाणा : जूझते जुझारू लोग – 131
मास्टर रामरत्न अहलावत – संघर्षशील और सिद्धांत प्रिय
सत्यपाल सिवाच
मास्टर रामरत्न अहलावत हरियाणा के अध्यापक आन्दोलन के उन सितारों में शामिल हैं जो कभी आत्मप्रशंसा, दिखावे आदि के पीछे नहीं भागे, बल्कि न्याय और सिद्धांतों के लिए डटे रहे हैं। मेरी और उनकी मुलाकात लगभग 1985-86 में हुई थी। तब से अब तक मैंने उन्हें कभी संघर्षों और न्याय पथ से विचलित होते नहीं देखा। उनका जन्म 15 दिसम्बर 1942 को भिवानी जिले के घसोला गाँव में हुआ था। उनके पिता श्री जगराम अहलावत चाहते थे कि बच्चे पढ़कर आगे बढ़ें।
किसान परिवार की पृष्ठभूमि में उस वक्त पले – बढ़े सभी बच्चों का जीवन कठिन परिश्रम की राह से गुजरता था। रामरत्न जी के मामले में भी यही सत्य है। दसवीं कक्षा पास करने बाद उन्होंने जे.बी.टी. प्रशिक्षण लिया और 30 सितम्बर 1963 को प्राथमिक शिक्षक नियुक्त हो गए।
जिन दिनों वे सेवा में आए तब से छह साल पहले जिला परिषदों के तहत कार्यरत शिक्षकों को सरकारी सेवा में ले लिया गया था। नए अध्यापक शिक्षा विभाग ने भर्ती किए थे। इसके कुछ समय बाद ही कोठारी शिक्षा की सिफारिशों के आने के बाद जागृति की लहर चल पड़ी थी। सन् 1966 में अलग राज्य के गठन के बाद शिक्षा आयोग का लाभ लेने के लिए संयुक्त अध्यापक दल का बन गया।
यहीं से रामरत्न अहलावत आन्दोलन के समर्थक बन गए थे। उन्होंने सन् 1968 में दस जनवरी और आठ-नौ फरवरी की हड़तालों में भी भाग लिया था। बाद में वे हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ के कार्यकर्ता के रूप में 1973 की हड़ताल में शामिल रहे। वे एक महीने तक महेन्द्रगढ़ जेल रहे और नौकरी से बर्खास्त कर दिए गए।
यद्यपि वे शिक्षक बनने के पहले दो-तीन सालों में ही आन्दोलन में भाग लेने लगे थे। जब 1985 में यूनियन में व्यक्तिवादी कार्यप्रणाली के खिलाफ माहौल बनने लगा तो इन्होंने दादरी क्षेत्र में मजबूती से कमान संभाल ली। सर्वकर्मचारी संघ बनने के बाद वे 1987 के आन्दोलन में तीन दिन तक पुलिस हिरासत में रहे, लेकिन दृढ़ता से डटे रहे।
सन् 1993 में उन्हें फिर से बर्खास्त किया गया जो समझौता होने पर दुरस्त हो गया। सन् 1996-97 की पालिका हड़ताल में वे 35 दिन हिसार जेल में रहे। वे 31.12.2000 को सेवानिवृत्त होने तक सभी आन्दोलनों भाग लेते रहे तथा संगठन में भी कोई न कोई जिम्मेदारी लेते रहे।
रामरत्न जी स्वभाव से सामाजिक व्यक्ति रहे हैं। सन् 2000 में सेवा निवृति के बाद उन्होंने दादरी क्षेत्र में किसान सभा का निर्माण करवाने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया। लगभग दो साल लम्बी बीमारी के बाद 30 अप्रैल 2026 को उनकी जीवन यात्रा पूरी हो गई। परिवार में उनके एक युवा बेटे तथा एक युवा पोते के असामयिक निधन ने उनको मानसिक व शारिरिक रूप से भारी ठेस पहुंचाई।
वर्षों पहले दादरी में भिवानी जिले का सम्मेलन था। मुझे चुनाव पर्यवेक्षक लगाया गया था। कुछ लोग बहुमत प्रतिनिधियों की भावनाओं का संज्ञान न लेकर संगठन पर कब्जा जमाना चाहते थे। उन दिनों रामरत्न जी जिला अध्यक्ष थे। इन्होंने बहुत बुद्धमत्ता, संयम और अनुशासित माहौल रखते हुए सम्मेलन को सफलतापूर्वक सम्पन करवाया।
मास्टर जी एक मृदुभाषी थे; अच्छे संगठन कर्ता थे व सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और उन्होंने अपने अध्यापन कार्य को समर्पित भाव से किया तथा जनवादी आंदोलनों में बहुत ही सक्रिय नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। उनके बड़े बेटे नरेन्द्र अहलावत ने अपने पिता जी की संघर्षशील विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।

लेखक – सत्यपाल सिवाच
