छोटे लम्हे, बड़ी सीख (6)

समय – समाज

छोटे लम्हे, बड़ी सीख (6)

डॉ रीटा अरोड़ा

 

1. पुराना गाना

रेडियो पर पुराना गाना बजा, माँ की आँखें भर आईं। बोलीं-“ये तुम्हारे पापा का पसंदीदा था।”

सीख: यादें आवाज़ों में भी छिपी होती हैं।

 

2. चुप्पी का दर्द

घर में सब थे, फिर भी माँ चुप थी।

किसी ने पूछा नहीं-“आप कैसी हैं?”

सीख: कभी-कभी सबसे बड़ा अकेलापन अपनों के बीच होता है।

 

3. पुरानी फोटो

पिता अकेले बैठकर पुरानी फोटो देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे।

वो वही दिन थे जब घर में सब साथ थे।

सीख: वक्त गुजर जाता है, पर यादें वहीं ठहर जाती हैं।

 

4.टूटी चप्पल

पिता की चप्पल घिस चुकी थी, फिर भी नई नहीं ली।

कहा-“अभी काम चल रहा है।”

सीख: वो अपनी जरूरतों को छोटा बना देते हैं, बच्चों के सपनों के लिए।

 

5. खास तारीख

बेटा अपना जन्मदिन दोस्तों के साथ मना रहा था।

घर पर माँ केक के साथ उसका इंतज़ार कर रही थी।

सीख: हमारी हर खास तारीख, उनके लिए आज भी उतनी ही खास है।

 

6. अधूरी नींद

बच्चा बीमार था, माँ पूरी रात जागती रही। सुबह बच्चे ने पूछा-“आप सोई नहीं?”

माँ ने कहा-“तुम सो गए थे, वही काफी है।”

सीख: माँ की नींद, बच्चे की सुकून में छिपी होती है।

 

7. नोकझोंक

भाई-“मुझसे बात मत करना!”

बहन-“ठीक है… पर चाय बना दी है, पी ले।”

सीख: सच्चे रिश्तों में नाराज़गी भी जल्दी पिघल जाती है।

 

8. माँ की आदत

माँ-“तुम्हारा पसंदीदा खाना बनाया है…”

बेटा-“माँ, मैं तो यहाँ हूँ ही नहीं।”

सीख: माँ के लिए बेटा कहीं भी हो, उसकी पसंद नहीं बदलती।

 

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