हरियाणा : जूझते जुझारू लोग – 115
चन्द्र नवदीप भारती – कुशल संगठनकर्ता और भरोसेमंद
सत्यपाल सिवाच
चन्द्र नवदीप भारती हरियाणा राज्य के एक छोटे से कस्बे से शुरू करके पूरे देश के शिक्षक आन्दोलन का सर्वाधिक भरोसेमंद चेहरा बन चुके हैं। उनका जन्म 13 अक्तूबर 1962 को श्रीमती दयावंती और श्री ओमप्रकाश ‘बहार’ के घर हुआ। उनका जन्म स्थान श्रीगंगानगर राजस्थान है। उनके पिता जी सरकारी अध्यापक थे और उच्च विद्यालय मुख्याध्यापक पद से 30 अप्रैल 1994 को सेवानिवृत्त हुए थे। वे दो बहनें और दो भाई हैं। एम.ए., इतिहास एवं बी.एड. हैं। उनकी तीसरी कक्षा तक की पढ़ाई रतिया में और बाद की स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल कुंजपुरा जिला करनाल में हुई है जहाँ वे सन् 1972 से 1979 तक रहे।
सी.एन. भारती 3 अक्तूबर 1984 को अस्थायी आधार पर सेवा में आए, 1 नवंबर 1986 से उनकी सेवाएं नियमित हुईं और 13 फरवरी 2004 तक गणित अध्यापक रहे। 14 फरवरी 2004 से 31 अक्तूबर 2020, प्राध्यापक इतिहास के रूप में सेवानिवृत्त हुए। वे अंतिम सात वर्ष तक ब्लॉक इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन एंड ट्रेनिंग (BIET) जाखनदादी (फतेहाबाद) में शिक्षक रहे और एक अध्यापक प्रशिक्षक के रूप में बेहतरीन काम करके दिखाया। वे अपने छात्रों और शिक्षकों में अत्यधिक लोकप्रिय रहे हैं। अपने शांत स्वभाव, सौम्यता, तर्कशील, सदैव सहयोगी और भरोसेमंद होने के कारण जिसके भी संपर्क में आते हैं वह इनका हो जाता है।
इन्होंने हरियाणा राजकीय/विद्यालय अध्यापक संघ, सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा, स्कूल टीचर्ज फेडरेशन ऑफ इंडिया और रिटायर्ड कर्मचारी संघ, हरियाणा में काम किया। संगठन में आने की मौलिक एवं प्रारंभिक प्रेरणा अपने पिता ओ.पी. बहार से ही मिली जो अपने समय बहुत प्रबुद्ध, अनुशासित, समर्पित और न्यायप्रिय कार्यकर्ता थे। भारती ने 1986-88 में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू किया। वे 1988-90 एवं 1990-92 में खण्ड प्रधान, रतिया चुने गए। सन् 1992-94, 1994-96, 1996-98 में लगातार तीन बार जिला सचिव हिसार चुना गया।
उनकी सांगठनिक क्षमताओं और समर्पण भाव को देखकर सन् 1998-2000, 2000-2002, 2002-04, 2006-08, 2011-14 एवं 2014-17 तक 6 बार राज्य महासचिव बनाया गया। सन् 2004-06 सत्र में वे राज्य कोषाध्यक्ष, 2008-11 राज्य आडिटर, 2017-21: राज्य प्रधान और 2021-24 में सलाहकार समिति के संयोजक के रूप राज्य कार्यकारिणी के सदस्य रहे। 2009-2025 तक अध्यापक लहर पत्रिका के मुख्य सम्पादक का उत्तरदायित्व भी संभाला। वे सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा में 1988-90, 1990-92, 1992-94: खण्ड रतिया प्रधान, 1994-96, 1996-98 सह सचिव जिला हिसार, 1998-2000 प्रधान जिला फतेहाबाद, 2010-2013 में राज्य कोषाध्यक्ष और 1998 से 2021 तक राज्य कमेटी सदस्य रहे। सन् 2000 से 2012 तक स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की केन्द्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, 2012 से 2015 तक कोषाध्यक्ष, 2015 से 2018 व 2018-22 तथा 2022-25 तीन बार महासचिव और 2025 से 2028 के लिए अध्यक्ष चुने गए हैं। उन्हें रिटायर्ड कर्मचारी संघ का 2022-25 राज्य उपप्रधान बनाया गया।
पिता अध्यापक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता व पदाधिकारी रहे, 1973 के आंदोलन में विशेष भूमिका रही। हक और सच के पक्ष में खड़े होने की मानसिकता रही है। आदर्श के रूप में सत्यपाल सिवाच, फूल सिंह श्योकंद जैसे यूनियनिस्ट से प्रभावित होना भी लगातार सक्रिय रहने का आधार बना। भले ही वे उदारता से अन्य साथियों से प्राप्त प्रेरणा को स्वीकार करें, कुछ विशिष्टताएं उनके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा हैं। वे बेहद ईमानदार, कर्तव्यपरायण, लग्नशील और व्यावहारिक बुद्धि के स्वामी होने के कारण बड़े से बड़ी बाधा के बीच से भी रास्ता ढूंढ लेते हैं। यहाँ तक प्रशासनिक अधिकारी भी उनके इस व्यवहार के कायल रहे हैं।
1993 व 1998 में दो बार हिसार जेल की कुल सात दिन की जेल में रहे। 1993 व 2011तक सैक्शन 7 में चार्जशीट किया गया। आंदोलन के दौरान चण्डीगढ़ में 2 बार, पंचकूला में एक बार, भिवानी व फतेहाबाद में एक-एक बार पुलिस केस बने और अनेक बार स्थानीय स्तर पर गिरफ्तार किया गया। सभी प्रकार का उत्पीड़न समझौता होने पर निरस्त किया जाता रहा। उन्होंने कभी उत्पीड़न समाप्ति के लिए निजी प्रयास नहीं किया।
सर्वकर्मचारी संघ के साथ जुड़ने के अनुभव को बहुत ही बेहतर मानते हैं। इससे व्यापक एकता की ओर बढ़े संगठन को विशेष पहचान मिली। अध्यापक संघ के नेतृत्व व अन्य कायकर्ताओं व पदाधिकारियों को अन्य विभागों में सम्मान व प्रतिष्ठा मिली। साझे संघर्षों से अध्यापकों के समय-समय पर सेवा संबंधी व आर्थिक लाभ भी प्राप्त हुए। मुख्यतः कई बार सेवा नियमितीकरण, बोनस, हायर पे-स्केल, ए.सी.पी., मेडीकल व शिशु शिक्षा भत्ता, आवास भत्ता आदि की शुरुआत हुई। सबसे बड़ा कर्मचारी की अपने स्तर पर पहचान बनी। वे आन्दोलनों के बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं – “विभागीय व एस.के.एस. के वो संघर्ष जिनमें नेता के रूप में भाग लिया 1998 के बाद ह.वि.अ.संघ के सभी आंदोलनों में नेता के रूप में भाग लिया। एस.टी.एफ.आई. के राष्ट्रीय स्तर के सभी प्रदर्शनों में मुख्यतः दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन, नवम्बर 2016 में दिल्ली की एस.टी.एफ.आई. की रैली, नवम्बर 2023 की रामलीला मैदान की रैली व जंतर-मंतर के प्रदर्शन आदि में संगठनकर्ता की हैसियत से भाग लिया।”
आन्दोलनों के बारे में परिवार के योगदान की चर्चा करते हुए कहा – इस संबंध में मिले-जुले अनुभव हैं। जब तक पिता जी जीवित थे 2004 तक परिवार से पूर्ण सहयोग रहा। 2018 के बाद पत्नी का एक्सीडेंट होने व स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उभर आने पर बाहर आने-जाने में विशेष समस्याएं रही हैं। राजनेताओं से विशेष व निजी संपर्क किसी से नहीं रहा। इसी तरह विशेष व निजी तौर पर किसी से नहीं, परन्तु के. के. खंडेलवाल को अच्छे व बुरे दोनों तौर पर मानते हैं। राजीव रत्न आई.ए.एस. भी अच्छे ढंग से डील करते थे। सामान्यतः कभी निजी काम नहीं निकलवाए।
वे आत्मावलोकन करते हुए कहते हैं कि लंबे अर्से के कार्यकाल में अनेक भूल व गलतियां हुई परन्तु ऐसी विशेष कोई नहीं जिन्हें दर्ज करवाना जरूरी हो। भावी पीढ़ी को सचेत करते हुए वे कहते हैं कि सांगठनिक कार्यों में निष्ठा व समर्पण जरूरी है। जनवादी सोच व कार्यप्रणाली को आगे रखा जाए व निजी सोच व निजी हित से दूरी बनाना। ईमानदारी, पारदर्शिता, रोजमर्रा जीवन के अंग होना चाहिए व दिखने भी चाहिए। अंतिम कार्यकर्ता तक के लिए हमेशा उपलब्ध रहना। समाज के वंचित तबकों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।
पहले और आज के दौर पर टिप्पणी करते हुए कहा – सेवा का बदलता स्वरूप ; पक्के से कच्चे, पहचान की राजनीति के तहत अनेक संगठन, सेवा शर्तों का बदलाव, सोशल मीडिया पर किसी भी आधारहीन व्यक्ति या संस्थाओं द्वारा कर्मचारी आंदोलन के बारे दुष्प्रचार करना आदि के कारण संघर्षों में बहुत बदलाव आ गया है। अभी भी अगर कोई सकारात्मक गुंजाइश है तो वह सिर्फ व्यापक एकता से ही संभव है।
व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के बीच सन्तुलन बनाकर रखने के कारण वे स्वजनों, कुटुम्ब, स्कूल समय के मित्रों, ट्रेड यूनियन नेताओं, छात्रों, अभिभावकों और अन्य लोगों के बीच एक खास पहचान अर्जित कर चुके हैं। कोई भी उन पर सहज भरोसा कर सकता है। वे सच्चे-खरे इन्सान हैं। मुश्किल घड़ी बेबाक ढंग से साथ देने वाले हैं। उनका निजी और सामाजिक व्यवहार पूरी तरह पारदर्शी है।
उनकी पत्नी श्रीमती राज रानी भारती अध्यापिका रही हैं और सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उनका विवाह 09 मार्च 1988 को हुआ था। उनकी दो बटियां हैं और दोनों शादीशुदा हैं। बड़ी बेटी प्रीति बेटी पी.एन.बी. में पी.ओ. है, दामाद भी बैंक में पी.ओ. हैं। छोटी बेटी सिम्मी ने 5 साल प्राइवेट कम्पनी में काम किया, परन्तु वर्तमान में कम्पनी की छंटनी का शिकार होकर बेरोजगार है। छोटे दामाद मल्टी नैशनल कम्पनी में गुरूग्राम में कार्यरत हैं।

लेखक – सत्यपाल सिवाच
