पश्चिम बंगाल चुनाव में वामदलों के ‘बेहतर प्रदर्शन’ की संभावना: दीपांकर भट्टाचार्य
नयी दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वामदलों के ‘बेहतर प्रदर्शन’ की संभावना है, हालांकि वह नतीजों को लेकर कोई अटकल नहीं लगाएंगे।
भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों का मत प्रतिशत बढ़ेगा। उन्होंने कांग्रेस के अलग से लड़ने के फैसले से जुड़ी चिंताओं को भी खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा, ”हम बंगाल में वामदलों के बेहतर प्रदर्शन की संभावनाएं देख रहे हैं। मैं सीटों की संख्या के बारे में कोई अटकलें नहीं लगाने जा रहा हूं। लेकिन वाम दलों का मत प्रतिशत 10 से नीचे आ गया है। अगर आपको बंगाल में भाजपा की वृद्धि को रोकना है, तो वामपंथियों को उबरना होगा।”
भाकपा (माले) लिबरेशन वाम मोर्चा के समर्थन से पश्चिम बंगाल में 10 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है। वाम मोर्चे के साथ समझौते के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि माकपा के साथ वैचारिक मतभेद बने हुए हैं, लेकिन सहयोग आवश्यक हो गया है।
उनका कहना था, “माकपा के साथ हमारे बहुत मतभेद हैं, इसलिए हम वाम मोर्चे का हिस्सा नहीं हैं। हम एक स्वतंत्र कम्युनिस्ट पार्टी हैं। लेकिन हम पश्चिम बंगाल में कुछ हद तक वामदलों के उभार के उद्देश्य के लिए उनके साथ सहयोग कर रहे हैं।”
उन्होंने दोनों पार्टियों के बीच ऐतिहासिक रूप से खराब रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें सुधार हो रहा है।
भट्टाचार्य ने कहा, “इससे पहले एक उपचुनाव हुआ था, जहां पहली बार माकपा ने हमें समर्थन दिया था। इस बार, यह थोड़ा बड़े पैमाने पर होगा।”
उन्होंने कहा, “आशा करनी चाहिए कि जैसे हम कई मुद्दों पर संघर्ष के अन्य रूपों में सहयोग करते हैं, वैसे ही हम चुनावी क्षेत्र में भी सहयोग कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “भाजपा वास्तव में बंगाल में सत्ता हासिल करने के लिए बहुत उत्सुक है। यह सिर्फ मनोवैज्ञानिक लड़ाई नहीं है, वे वास्तव में सत्ता हासिल करने के लिए गंभीर कोशिश कर रहे हैं।”
वाम नेता ने उम्मीद जताई कि मतदाता भाजपा के प्रयास को “एक बार फिर अस्वीकार करेंगे।”
उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से पात्र मतदाता वंचित हो सकते हैं।
उनका कहना है, “बंगाल में एसआईआर बिहार की तुलना में बहुत खराब प्रतीत होता है।”
भट्टाचार्य ने इसे लोकतंत्र का मजाक करार दिया।
अन्य चुनावी राज्यों में पार्टी की रणनीति को रेखांकित करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि भाकपा (माले) लिबरेशन केरल में सिर्फ तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है और अन्य जगहों पर एलडीएफ को समर्थन दे रही है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में पार्टी लगभग 14 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है।
भट्टाचार्य ने असम को लेकर कहा कि राज्य में चुनावी माहौल बहुत ध्रुवीकरण वाला है।
