जयपाल की कविता – हमला हुआ

युद्ध के विरुद्ध युद्ध-17

कविता हमेशा युद्ध के खिलाफ़ खड़ी रही है, भले ही तानाशाह युद्ध को राष्ट्रवादी गौरव बताकर उसका महिमामंडन करते रहे हों। लेकिन उसकी कीमत आम आदमी ने ही चुकाई है (महमूद दरवेश)। बहरहाल जो युद्ध चल रहे हैं उनके नकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहे हैं । किसी भी युद्ध में जहां बच्चे और महिलाओं समेत नरसंहार होते हैं, वहीं इस विध्वंस से अंतरराष्ट्रीय सामाजिक जीवन भी तहस-नहस होता है।

प्रतिबिंब मीडिया साहित्यकारों की इस चिंता से भली-भांति वाकिफ़ है। ‘युद्ध के विरुद्ध युद्ध’ शीर्षक के तहत हम आपका युद्ध विरोधी साहित्य प्रकाशित करेंगे। आप अपनी कविताएं, कहानियों समेत रचनाएं हमें भेजिए, उन्हें प्रतिबिंब मीडिया पर ससम्मान प्रकाशित किया जाएगा। आज प्रस्तुत है   जयपाल की एक और कविता – हमला हुआ। संपादक

कविता

हमला हुआ

जयपाल

 

दो देशों के बीच शुरू हुआ युद्ध

हमला हुआ एक दूसरे पर जोरशोर से

 

साथ ही हमला हुआ दोनों तरफ से

देशवासियों के विवेक पर

विवेक जो बहुत खतरनाक समझा जाता युद्ध के समय

साथ ही हमला हुआ संवेदनशीलता पर भी

जो देश का मनोबल गिराती है

देश की एकता को कम करती है

देश को हार की ओर ले जाती है

 

साथ ही हमला हुआ मानवता पर

जिसमें अपने-पराए का भेद नहीं रहता

राष्ट्रवादी लक्ष्य पूरे नहीं होते

देशभक्ति कमजोर पड़ जाती है

 

हमला हुआ युद्ध विरोधी विचारों पर भी

जिससे देश की सीमाएं कमजोर पड़ती हैं

मारे गए लोंगों के प्रति हमदर्दी बढ़ती है

और दूसरे देश तक चली जाती है

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