ओमसिंह अशफ़ाक की कविता – बोल, बम बोल बम

कविता

बोल, बम बोल बम

ओमसिंह अशफ़ाक

 

जिनका आज राज है

उन्ही  का  सुराज है

शिक्षा  भी  उनकी है

स्कूल  भी  उनका

शाखा  भी  उनकी है

फूल  भी  उनका

शास्तर भी उनका है

शस्तर  भी  उनका

गुजरात भी उनका है

बस्तर  भी  उनका

गलबा  भी  उनका है

मलबा  भी  उनका

तेरा क्या है फटकचंद

बोल बम, बोल बम!!

 

अयोध्या भी उनकी है

राम   भी   उनका

मथुरा भी उनकी है

श्याम  भी  उनका

आस्था भी उनकी है

कत्लेआम भी उनका

हिमालय भी उनका है

हिंदी   भी   उनकी

माथा  भी  उनका है

बिंदी   भी   उनकी

थान   भी  उनका है

चिंदी   भी   उनकी

तेरा क्या है फटकचंद

बोल बम, बोल बम!!

 

गंगा  भी  उनकी है

मंदिर  भी  उनका

सरस्वती  उनकी है

समंदर  भी  उनका

द्वारका  उनकी  है

द्वारपाल  भी  उनका

प्रधानमंत्री  उनका  है

राज्यपाल  भी  उनका

गॉडसे  भी  उनका  था

अब  गांधी भी उनका है

नकदी  भी  उनकी  है

चांदी  भी  उनकी  है

शहीद  भी  उनके  हैं

ताबूत  भी  उनका

जांच  भी  उनकी है

सबूत  भी  उनका

तेरा क्या है फटक चंद,

बोल बम, बोल बम!!

 

अफ़सर भी उनका है

दफ़्तर  भी  उनका

झंडा  भी  उनका है

डंडा  भी  उनका

कानून भी उनका है

मुस्टन्डा  भी  उनका

कोठी वाला उनका है

महल  का  भी  उनका

पब्लिक सेक्टर उनका है

तहलका  भी  उनका

संविधान  उनका  है

वकील  भी  उनका

हर्षद   उनका   है

शकील  भी  उनका

तेरा क्या है फटक चंद

बोल बम, बोल बम!!

 

कमीशन भी उनका है

खरीददार  भी  उनका

थाना  भी  उनका  है

थानेदार  भी  उनका

ममता  भी  उनकी  है

समता  भी  उनकी

जूती  भी  उनकी  है

जूत-पजार भी उनका

प्लाट  भी  उनके  हैं

जमीन  भी  उनकी

ड्राइवर  उनका  है

मशीन  भी  उनकी

बहुमत  उनका  है

मतभेद  भी  उनका

काला  भी  उनका है

सफेद  भी   उनका

तेरा क्या है फटक चंद

बोल बम, बोल बम!!

 

लोकतंत्र भी उनका है

तानाशाही भी उनकी

पाखंड  भी  उनका है

सफाई  भी  उनकी

छल-छदम उनका है

ढीठाई  भी  उनकी

सरकार उनकी है

तंतर  भी  उनका

पिशाच उनके हैं

मंतर  भी  उनका

मंत्री  उनका  है

विनिवेश  उनका

विध्वंस  उनका  है

फिर भी  देश उनका

तेरा क्या है फटक चंद

बोल बम, बोल बम!!

 

करतूत  उनकी  है

‘रिएक्शन’ भी उनका

मारकाट उनकी  है

फिर इलेक्शन भी उनका

सिलेबस उनका  है

झाड़-फूंक  उनकी

बजरंगी उनके  हैं

साड़-फूंक  उनकी

शिवजी उनका है

गणेश  भी  उनका

सती  उनकी  है

कले़श भी उनका

देश  उनका  है

परदेश    उनका

कभी-कभी उनका है

हमेश     उनका

तेरा क्या है फटक चंद

बोल बम, बोल बम!!

 

उन्हीं  की  मर्यादा है

उन्हीं का उल्लंघन है

उन्हीं  की  सीता है

उन्हीं का रघुनंदन है

उन्हीं  के  बन हैं

उन्हीं के बनवासी

उन्हीं  का  वृंदावन

उन्हीं  की  काशी

उन्हीं  की  अग्नि है

उन्हीं  का  कलाम है

उन्हीं  का  पोखरण है

उन्हीं  का  रतलाम है

उन्हीं  की  रेल  है

उन्हीं  का जो़न है

उन्हीं का उत्पात है

उन्हीं  का  मौन  है

बार-बार बोलता  है

तू  तीसरा  कौन  है

तेरा क्या है फटक चंद

बोल बम, बोल बम!!

(जुलाई-अगस्त 2002)

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *