आपदा में अवसर

‌आपदा में अवसर

 

आज तोताराम अपेक्षाकृत जल्दी आ गया ।

हमने कहा- तोताराम, ठीक है मुफ़्त के माल पर बड़े बड़े संत भी पिल पड़ते हैं लेकिन बाद में भुगतना तो खुद को ही पड़ता है । अन्य दिनों की बजाय आदमी दीर्घ शंका के लिए जल्दी जाना पड़ता है । कहाँ भागी जा रही थी तेरी चाय ।

बोला- मास्टर, चाय की बात नहीं है । एक अच्छी खबर है । आपदा में अवसर ।

हमने कहा- आपदा में अवसर व्यापारियों के लिए होते हैं । वे अपने पास पड़े पुराने स्टॉक की कालाबाजारी करने लग जाते हैं । अभी इजराइल वाले लफड़े में देख ले । आपदा का फायदा उठाकर बिकने लगा कि नहीं सिलेंडर तीन तीन हजार में । अदानी ने भी अपनी गैस के दाम बढ़ा दिए कि नहीं । और मोदी जी ने भी प्रति सिलेंडर 60 रुपये बढ़ा ही दिए ।

बोला- मोदी जी कोई व्यापारी थोड़े हैं । वे तो सब कुछ राष्ट्रहित में करते हैं । यहाँ तक कि दिन में दस-दस ड्रेसें बदलना भी वे भी भारत की गरीब राष्ट्र की इमेज सुधारने के लिए करते हैं अन्यथा वे तो संत हैं । उनके लिए तो एक चीवर ही पर्याप्त है । देखा नहीं था केदारनाथ की गुफा में और गंगा में स्नान करते हुए मात्र एक भगवा वस्त्र में ।

हमने कहा- देख लेना जब अमेरिका इज्जत बचाने के लिए ईरान से खिसक लेना तब भी मोदी जी 60 रुपये की यह वृद्धि वापिस नहीं लेंगे । जी एस टी उत्सव की तरह दस रुपये घटाकर फिर कोई बचत उत्सव जरूर मना लेंगे ।

बोला- छोड़, ये सब बड़े लोगों की बातें हैं । मैं तो अपने लिए आपदा में अवसर की बात कर रहा था ।

हमने कहा- हमारे लिए तो आपदाएं ही होती हैं । अवसर तो व्यापारियों और नेताओं के लिए होते हैं । राम मंदिर को ही देख ले ।राम मंदिर और विकास के नाम पर लोगों की ज़मीनें कब्जा लीं और दुकाने उजाड़ दीं और बड़े व्यापारियों को होटलों के लिए दे दीं । नेताओं को राम के नाम पर गद्दी मिल गई और गुजरात के व्यापारियों को धंधा । दोनों की बंदरबाँट । और भगवान और सच्चे भक्तों को क्या मिला ? मिलावटी प्रसाद । ये तो प्रभु कुछ खाते नहीं हैं अन्यथा अब तक पेट स्थायी रूप से खराब हो गया होता ।

बोला- अपने मन की बात छोड़ और काम की बात सुन । अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि ईरान के दस लोगों के बारे में खबर देने वाले को दस मिलियन डालर का इनाम दिया जाएगा । अब हम लोगों को गैस के सिलेंडर का चक्कर छोड़कर ईरान के अमेरिका के लिए वांटेड लोगों का पता लगाना चाहिए । वैसे भी मोदी जी ने कह दिया है कि गैस की कोई समस्या नहीं है । और कुछ कमी हुई तो नाले से निकाल लेंगे ।

हमने कहा- हमें जब बैंक का क्लर्क सीट पर नहीं मिलता तो यह तक तो पता लगा नहीं सकते कि वह छुट्टी पर है या इधर उधर चाय या पूजा के बहाने मटरगश्ती कर रहा है । मोदी जी तक का तो पता नहीं लगा सकते कि मणिपुर और संसद की महत्वपूर्ण कार्यवाही छोड़कर इजराइल गए हैं या किसी गुफा में ध्यान लगा रहे हैं या चुनाव प्रचार कर रहे हैं और ईरान के नेताओं का पता लगा लेंगे । अंधभक्तों की तरह दुनिया के नक्शे में ईरान ढूँढ़ने में चार दिन लग जाएंगे । यह कोई मस्जिद में नीचे मंदिर ढूँढ़ने जितना आसान थोड़े है ।

बोला- जैसे मोदी जी कपड़े देखकर आतंकवादियों को पहचान लेते हैं तो अपन भी किसी काली पगड़ी वाले का पता दे देंगे या ट्रम्प से उन दस लोगों का कोई अंतःवस्त्र या दाढ़ी का बाल मँगवा लेंगे और उससे कोई टोना टोटका या मारण मंत्र का जाप कर देंगे तो वहीं का वहीं मर जाएगा । अपने सतातन में तो ऐसे बहुत मिसाइलों का ज्ञान भरा पड़ा है । पहले भी तो हमारे यहाँ के भक्तों ने यज्ञ करके ट्रम्प को चुनाव जिताया था कि नहीं ? और कुछ नहीं तो इस बहाने कुछ एडवांस ही ट्रम्प से कबाड़ लेंगे । काम नहीं हुआ तो वापिस कर देंगे ।

हमने कहा- तू ट्रम्प को इतना भोला समझता है क्या ? वह कोई गांधी नेहरू की तरह भला आदमी नहीं है । उसका इतिहास सुनेगा तो तेरी तेरी अकल ठिकाने आ जाएगी । वह नेता नहीं प्रॉपर्टी डीलर है । उसे अपनी राजनीति के थ्रू अपने बेटे को दुनिया में बिजनेस दिलवाना है । मोदी जी खुद को बड़ा चतुर समझते थे । उनसे ही अमेरिका में अपने लिए चुनाव प्रचार करवा लिया और अब उन्हीं को बर्फ में लगा दिया कि नहीं ? पता नहीं, किस किस फ़ाइल के चक्कर में ऐसा फँसा दिया कि अब थूक सूख रहा है, जुबान नहीं खुल रही है । रूस से अच्छी भली दोस्ती थी, सस्ता तेल मिल रहा था । ईरान से रुपये में डील हो रही थी । सब गड़बड़ करवा दिया । अब खरीदो महंगा तेल और पिटवाओ दुनिया में भद्द ।

बोला- फिर भी किसी न किसी तरह यह खबर उड़वा दें कि तोताराम और मास्टर ने ईरान के दस लोगों की अमेरिका को खबर देने का ठेका लिया तो कम से कम एक बार चर्चा तो वाइरल हो जाएगी । निशिकांत दुबे, गिरिराज सिंह, अनुराग ठाकुर की तरह चर्चित तो हो जाएंगे ।

हमने कहा- ये फालतू बातें छोड़ । चाय पीकर गैस एजेंसी का एक चक्कर लगा आते हैं । क्या पता बुकिंग हो ही जाए ।

बोला- आज संडे है । कल सोचेंगे । अब तो निश्चिंत होकर चाय पर बकवास करते हैं । और 2047 तक भारत को विकसित बनाने का ड्राफ्ट तैयार करते हैं ।

हमने कहा- कोई बात नहीं । वैसे यह काम मोदी जी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही कर दिया था । अब तो बस इंतजार कर उस दिन का अगर प्रभु तब तक जिंदा रखे तो । मोदी जी की बात और है वे तो …… ।

-रमेश जोशी

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