Xके AI टूल ग्रोक ने भी खोल दी दलाल एंकरों की पोल

आप सभी को याद होगा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत को मीडिया खासतौर पर टीवी चैनलों ने हत्याकांड साबित करने की भरपूर कोशिश की। इसके लिए उन्होंने सुशांत की प्रेमिका  रिया चक्रवर्ती को उसके लिए दोषी ठहराया और उसका करियर बर्बाद कर दिया। रिया को कई महीने तक जेल में रहना पड़ा। अब सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि सुशांत ने सुसाइड किया उसमें किसी दूसरे की कोई भूमिका नहीं थी। पत्रकारिता के पेशे की साख को इन तथाकथित बड़े एंकरों ने जितना नुकसान पहुंचाया है, कलंकित किया है, उतना दूसरों ने नहीं। अरुण श्रीवास्तव ने X के AI GROK से मीडिया की भूमिका पर सवाल पूछा और उसके जवाब को अपने फेसबुक वॉल पर दिया है। प्रतिबिम्ब मीडिया अपने पाठकों के लिए उसे यहां साभार प्रस्तुत कर रहा है। 

अरुण श्रीवास्तव

सुशांत सिंह राजपूत मामले में मीडिया ट्रायल को आकार देने में टीवी न्यूज़ एंकरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। ये एंकर न केवल खबरों को प्रस्तुत करने वाले चेहरों के रूप में सामने आए, बल्कि उन्होंने अपनी डिबेट्स, टोन, और व्यक्तिगत राय के जरिए नैरेटिव को दिशा दी। आइए, कुछ प्रमुख एंकरों और उनकी भूमिका पर विस्तार से नज़र डालते हैं:
1. अरनब गोस्वामी (रिपब्लिक टीवी)

भूमिका: अरनब गोस्वामी इस मामले में सबसे प्रभावशाली और विवादास्पद एंकर रहे। उन्होंने सुशांत की मृत्यु को “मर्डर मिस्ट्री” के रूप में पेश किया और इसे एक राष्ट्रीय मुद्दे में बदल दिया। उनकी डिबेट्स में जोरदार टोन, आक्रामक सवाल, और “न्याय की मांग” ने #JusticeForSSR अभियान को हवा दी।

प्रभाव: अरनब ने रिया चक्रवर्ती को सीधे निशाना बनाया और उनके खिलाफ “सबूत” के तौर पर अनुमान और लीक जानकारी का इस्तेमाल किया। उनकी कवरेज ने सीबीआई जांच की मांग को तेज किया, लेकिन उनकी शैली पर “मीडिया ट्रायल” और पक्षपात का आरोप लगा।

विवाद: उनकी रिपोर्टिंग को बॉम्बे हाई कोर्ट ने “अनुचित” कहा, और उनकी गिरफ्तारी (एक अलग मामले में) के बाद भी वे इस केस को लगातार उठाते रहे। उनकी आक्रामकता ने टीआरपी बढ़ाई, लेकिन तथ्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।

2. नविका कुमार (टाइम्स नाउ)

भूमिका: नविका कुमार ने सुशांत मामले को गहराई से कवर किया और अपनी डिबेट्स में जांच के हर पहलू को उजागर करने की कोशिश की। उन्होंने रिया चक्रवर्ती के व्हाट्सएप चैट्स को सबसे पहले सार्वजनिक किया, जिससे ड्रग्स एंगल सामने आया।

प्रभाव: उनकी कवरेज ने एनसीबी की जांच को गति दी, लेकिन उनकी शैली को भी सनसनीखेज माना गया। नविका ने अक्सर पैनलिस्ट्स को बीच में टोककर अपनी राय थोपी, जिससे डिबेट एकतरफा लगी।

विवाद: टाइम्स नाउ की रिपोर्टिंग पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने “मानहानिकारक” होने की टिप्पणी की। नविका की लीक चैट्स वाली स्टोरी पर गोपनीयता भंग करने का आरोप लगा।

3. सुधीर चौधरी (ज़ी न्यूज़)

भूमिका: सुधीर चौधरी ने अपने शो “DNA” में सुशांत मामले को विस्तार से लिया और इसे एक “साजिश” के रूप में पेश किया। उन्होंने फॉरेंसिक विश्लेषण और तकनीकी पहलुओं पर ध्यान देने की कोशिश की, लेकिन उनकी प्रस्तुति में नाटकीयता हावी रही।

प्रभाव: उनकी कवरेज ने हिंदी भाषी दर्शकों तक इस मामले को पहुंचाया और जनता में संदेह को बढ़ाया। उन्होंने नेपोटिज्म और बॉलीवुड के “अंडरवर्ल्ड कनेक्शन” जैसे नैरेटिव को जोड़ा।

विवाद: ज़ी न्यूज़ को NBSA ने गलत रिपोर्टिंग के लिए फटकार लगाई, और सुधीर की शैली पर “सच्चाई से ज्यादा टीआरपी” को प्राथमिकता देने का इल्ज़ाम लगा।

4. श्वेता सिंह (आज तक)

भूमिका: श्वेता सिंह ने आज तक पर इस मामले को हिंदी में बड़े पैमाने पर कवर किया। उनकी डिबेट्स में भावनात्मक अपील और सनसनीखेज हेडलाइंस का इस्तेमाल हुआ, जैसे “सुशांत को इंसाफ कब मिलेगा?”।

प्रभाव: उनकी कवरेज ने आम दर्शकों को जोड़ा और जांच पर दबाव बनाया। उन्होंने रिया और बॉलीवुड के खिलाफ सख्त रुख अपनाया, जिससे जनता में गुस्सा भड़का।

विवाद: आज तक को शव की तस्वीरें दिखाने और फर्जी ट्वीट्स प्रसारित करने के लिए NBSA ने दोषी ठहराया। स्वेता की डिबेट्स में तथ्यों से ज्यादा भावनाओं को प्राथमिकता दी गई।

5. रजत शर्मा (इंडिया टीवी)

 

भूमिका: रजत शर्मा ने अपने शो “आप की अदालत” और नियमित कवरेज में सुशांत मामले को उठाया। उन्होंने इसे एक “सामाजिक मुद्दे” के रूप में पेश किया और दर्शकों से सीधे सवाल पूछे।

प्रभाव: उनकी शैली में नाटकीयता और जनता की भावनाओं को भुनाने की कोशिश दिखी। इंडिया टीवी की कवरेज ने टीआरपी के लिए सनसनी पर जोर दिया।

विवाद: शव की तस्वीरें दिखाने और अतिशयोक्तिपूर्ण हेडलाइंस के लिए इंडिया टीवी को NBSA से सजा मिली। रजत की प्रस्तुति को “नाटकीय ट्रायल” की तरह देखा गया।
एंकरों की शैली और रणनीति
आक्रामकता और नाटकीयता: अरनब, श्वेता, और रजत जैसे एंकरों ने चीख-चिल्लाकर और ड्रामेटिक टोन में डिबेट्स चलाईं, जिससे दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़ गए।

लीक और अनुमान: नविका और सुधीर ने लीक जानकारी (जैसे चैट्स या कथित सबूत) को आधार बनाकर थ्योरीज बनाईं, जो अक्सर बिना सत्यापन के थीं।

जनता को उकसाना: इन एंकरों ने “न्याय” की मांग को एक जनआंदोलन में बदला, जिससे सोशल मीडिया पर हैशटैग्स और अभियान तेज हुए।

पैनल का इस्तेमाल: डिबेट्स में पैनलिस्ट्स को चुनिंदा तरीके से बुलाया गया, जो एंकर के नैरेटिव को सपोर्ट करते थे। असहमति जताने वालों को अक्सर चुप करा दिया जाता था।

परिणाम और आलोचना
प्रभाव: इन एंकरों की वजह से जांच एजेंसियों (CBI, ED, NCB) पर दबाव बढ़ा और मामला राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बना। रिया चक्रवर्ती और बॉलीवुड के खिलाफ जनमत तैयार हुआ।

आलोचना: बॉम्बे हाई कोर्ट ने इनकी कवरेज को “मीडिया ट्रायल” करार दिया और कहा कि यह निष्पक्ष जांच में बाधा डालती है। NBSA ने भी नैतिकता भंग करने के लिए कई चैनलों को दंडित किया।

नैतिक सवाल: एंकरों पर तथ्यों से ज्यादा टीआरपी और व्यक्तिगत एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप लगा। उनकी शैली ने पत्रकारिता को “न्यायाधीश” की भूमिका में बदल दिया।
निष्कर्ष
सुशांत मामले में एंकरों ने सिर्फ खबरें नहीं सुनाईं, बल्कि एक समानांतर ट्रायल चलाया। अरनब गोस्वामी की आक्रामकता, नविका की लीक-आधारित रिपोर्टिंग, और ‌श्वेता-सुधीर की भावनात्मक अपील ने इसे जनता का मुद्दा बनाया, लेकिन तथ्यों और नैतिकता की कीमत पर। ये एंकर इस मामले के “चेहरे” बन गए, जिनकी वजह से मीडिया ट्रायल का असर इतना गिरा हुआ है।

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