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व्यक्ति-पूजा किस तरह लोकतंत्र को पटरी से उतार देती है

व्यक्ति-पूजा किस तरह लोकतंत्र को पटरी से उतार देती है   निरुपमा राव   1937 में, जब देश औपनिवेशिक गुलामी…

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दुनिया में कोई परिपक्व लोकतंत्र इतनी बड़ी विधायिका नहीं रखता

शशि थरूर से बहुत लोग असहमत रहते हैं, मैं भी उनमें से हूँ, मगर हाल में उन्होंने अपने लेख में…