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शैलेन्द्र की कविता – नेताओं को न्यौता!

विरासत  / कविता नेताओं को न्यौता! शैलेन्द्र लीडर जी, परनाम तुम्हें हम मज़दूरों का, हो न्यौता स्वीकार तुम्हें हम मज़दूरों…