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हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा…

व्यंग्य हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा… फैसलों का “ट्रायल वर्जन” रमेश सिद्धू मौसम बदला है, लेकिन…