Blogसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

व्यंग्य की धार पर चलता समकालीन यथार्थ: नित्शे की कुटाई

पुस्तक समीक्षा व्यंग्य की धार पर चलता समकालीन यथार्थ: नित्शे की कुटाई अंकित कात्यायन कहानी-संग्रहों की अपनी एक विशिष्ट व्यंजना…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- धर्म,जात और राष्ट्रवाद !

कविता धर्म,जात और राष्ट्रवाद ! मंजुल भारद्वाज   विश्व की अखंडता समग्रता और विविधता का समूल नाश करने का षड्यंत्र…