HomeBlogमंंजुल भारद्वाज की कविता – अंत तो मौत है! मंंजुल भारद्वाज की कविता – अंत तो मौत है! 14 October 202514 October 2025Pratibimb Media कविता अंत तो मौत है! मंजुल भारद्वाज अंत तो मौत है आओ जी कर देखते हैं ! माना उसके पास सत्ता है,व्यवस्था है उसका हारना कठिन हो पर, आओ ललकार कर देखते हैं ! शरीर भोग है जलकर मिलेगा ख़ाक में आओ चेतना की चिंगारी से दुनिया में उजाला करते हैं! Post Views: 197
त्रिपुरा में माकपा का पुस्तक स्टॉल हटाया त्रिपुरा में माकपा का पुस्तक स्टॉल हटाया पार्टी ने कहा, प्रगतिशील साहित्य को दबाने का प्रयास अगरतला। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी…
डॉ रणबीर सिंह दहिया की रागनी- लेबर कोड रद्द करो रागनी लेबर कोड रद्द करो डॉ रणबीर सिंह दहिया लेबर कोड रद्द करो की देवै चारों तरफ गूंज सुनाई।।…
मंजुल भारद्वाज की दो कविताएं मंजुल भारद्वाज की दो कविताएं 1 कब इंसान बनेगी? क्या फ़र्क है पल्लू, घूंघट,नक़ाब या हिज़ाब पहनी इन…