HomeBlogमंंजुल भारद्वाज की कविता – अंत तो मौत है! मंंजुल भारद्वाज की कविता – अंत तो मौत है! 14 October 202514 October 2025Pratibimb Media कविता अंत तो मौत है! मंजुल भारद्वाज अंत तो मौत है आओ जी कर देखते हैं ! माना उसके पास सत्ता है,व्यवस्था है उसका हारना कठिन हो पर, आओ ललकार कर देखते हैं ! शरीर भोग है जलकर मिलेगा ख़ाक में आओ चेतना की चिंगारी से दुनिया में उजाला करते हैं! Post Views: 226
विष्णु नागर का व्यंग्य – चड्डी कथा व्यंग्य चड्डी कथा विष्णु नागर 1 प्रभु: हे वत्स चड्डी छोड़ पैंट क्यों धारण की? चड्डीधारी: हे, प्रभो उन…
खुश मत होइए- आरबीआई की ब्याज दर में मामूली कटौती से ऋण, कारोबार या कमजोर होती अर्थव्यवस्था को कोई खास फायदा नहीं होगा इस नम पटाखे के लिए पाँच साल का इंतज़ार? भारतीय रिज़र्व बैंक की तिमाही-बिंदु कटौती ( quarter-point cut) विफल हो गई…
विमल वर्मा: आधुनिक हिंदी साहित्य का एक जाना-माना आलोचक और संपादक स्मृति शेषः एक अनोखा, विलक्षण व्यक्तित्व विमल वर्मा: आधुनिक हिंदी साहित्य का एक जाना-माना आलोचक और संपादक अरुण माहेश्वरी…