HomeBlogमंंजुल भारद्वाज की कविता – अंत तो मौत है! मंंजुल भारद्वाज की कविता – अंत तो मौत है! 14 October 202514 October 2025Pratibimb Media कविता अंत तो मौत है! मंजुल भारद्वाज अंत तो मौत है आओ जी कर देखते हैं ! माना उसके पास सत्ता है,व्यवस्था है उसका हारना कठिन हो पर, आओ ललकार कर देखते हैं ! शरीर भोग है जलकर मिलेगा ख़ाक में आओ चेतना की चिंगारी से दुनिया में उजाला करते हैं! Post Views: 307 Like 0 0 Comments
हर धर्म को भाषा की ज़रूरत होती है, लेकिन किसी भाषा को धर्म की ज़रूरत नहीं होती हर धर्म को भाषा की ज़रूरत होती है, लेकिन किसी भाषा को धर्म की ज़रूरत नहीं होती ऑल इंडिया कैफ़ी…
डॉ रणबीर सिंह दहिया की रागनी- आज का सच रागनी आज का सच डॉ रणबीर सिंह दहिया झूठे रास्ते बढ़ते जा रहे सच के रास्ते आज बदल…
जयपाल की ‘चलते-चलते’ चार लघु कविताएं चलते-चलते चार लघु कविताएं जयपाल 1 उसका नाम स्कूल के दिनों की बात है हड्डियां चमकती थी उसकी कपड़े…