कविता
कुछ यूँ ही
महेश राजपूत
तुमने गलत जनरेशन से पंगा ले लिया, ब्रो!
बारह साल की अपनी मेहनत पे पानी फेर दिया, ब्रो!
लाठी, गोली से नहीं डरे हम,
तुम हमारी गाली से डर गए, ब्रो!
लटका देंगे, हिट मारेंगे कहकर धमकाया
फिर मैदान से भाग गए तुम, ब्रो!
हिंदू मुस्लिम करते करते बाँटना चाहा जिनको,
हिंदुस्तानी बनकर तुमसे भिड़ गए, ब्रो!
ना पढूंगा, ना पढ़ने दूंगा सोचा होगा तुमने,
पर जेन-ज़ी ने अच्छा सबक सिखाया, ब्रो!
तुमने गलत जनरेशन से पंगा ले लिया, ब्रो!
बारह साल की अपनी मेहनत पर पानी फेर दिया, ब्रो!
