रमेश जोशी की कविता – देखो साधो जग बौराना 

कविता

देखो साधो जग बौराना

बंगाल में चुनावी नाटक : बतर्ज़ कबीर

 

रमेश जोशी

 

देखो साधो जग बौराना

नहीं राम से सीख चाहिए

सिर्फ वोट की भीख चाहिए

वहाँ वहाँ ले राम बंदरिया

मज़मा लगा नचाना ।

साधो देखो….

 

कर साबुत मछली लटकाएं

वोट माँगने हिन्दू जाएँ

महँगे मशरूमों के रसिया

सड़क किनारे मुड़ी चबाना ।

साधो देखो……

 

लल्लू पंजू रोब जमाएं

अंडों की रेहड़ी हटवाएं

पर बंगाल चुनाव जीतने

मंगल मछली खाना ।

साधो देखो…..

 

बार बार पैजामा खिसके

अंदर का विकास सब दीखे

क्या दिखलाना किसे छुपाना

बिल्कुल समझ न आना ।

देखो साधो….

 

गंगा हुगली नाव चलाना

फ़ोटो खींच और खिंचवाना

छठ स्नान हेतु दिल्ली में

नकली घाट बनाना ।

साधो देखो…..।

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