पंजाब और यूपी विस चुनावों से कुछ महीने पहले कांग्रेस ने नए अध्यक्ष बनाए
हाकी के दिग्गज रहे परगट सिंह को पंजाब और आराधना मिश्रा ‘मोना’ को यूपी की कमान सौंपी
नई दिल्ली। राज्य में होने वाले चुनावों से कुछ महीने पहले संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए, कांग्रेस ने पंजाब और उत्तर प्रदेश यूनिट के लिए दो नए अध्यक्षों को जिम्मेदारी सौंपी हैं। पंजाब में हॉकी के दिग्गज परगट सिंह को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि उत्तर प्रदेश में आराधना मिश्रा ‘मोना’ पार्टी की कमान संभालेंगी।

कांग्रेस ने पंजाब यूनिट के प्रमुख के तौर पर एक जाट सिख की जगह दूसरे जाट सिख को चुना है। इससे कांग्रेस के सबसे मजबूत मतदाता नाराज नहीं होंगे। पिछले चुनावों में कांग्रेस का साथ जाट सिख मतदाता देते रहे हैं। परगट सिंह के चयन से पार्टी में निरंतरता बनी रहेगी और साथ ही राज्य में चल रही गुटबाजी से निपटने में सहायता मिलेगी। दिग्गज हाकी खिलाड़ी रहे परगट सिंह भारतीय टीम के फुल-बैक डिफेंडर और कप्तान रह चुके हैं। वह जालंधर कैंट से कई बार विधायक रहे हैं। परगट सिंह को हॉकी में उनकी उपलब्धियों के लिए पद्म श्री और अर्जुन अवॉर्ड मिल चुका है और वे पंजाब के खेल मंत्री भी रह चुके हैं।
उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग की जगह ली है, जिन्होंने दो दिन पहले ही अपना इस्तीफ़ा दिया था। हाई कमान के सामने यह चुनाव था कि क्या जाट सिख वड़िंग की जगह किसी हिंदू चेहरे को लाया जाए या राज्य इकाई के प्रमुख पद पर किसी जाट सिख को ही बनाए रखा जाए। सिख-बहुल राज्य में हिंदू आबादी लगभग 40 प्रतिशत है और शहरी इलाकों में वे एक अहम वर्ग हैं, जबकि जाट सिख आबादी का अनुमानित हिस्सा लगभग 22 प्रतिशत है, लेकिन वे सबसे प्रभावशाली जाति समूह हैं। 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद से ज़्यादातर मुख्यमंत्री जाट सिख ही रहे हैं, जिनमें मौजूदा मुख्यमंत्री, भगवंत मान भी शामिल हैं।
यह बदलाव पार्टी द्वारा पिछले महीने अपने केंद्रीय प्रभारी को बदलने के बाद हुआ है। भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को नियुक्त किया गया, क्योंकि बघेल को राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के गुटों के बीच चल रही लड़ाई में एक पक्ष का साथ देते हुए देखा गया था। परगट सिंह को वड़िंग-विरोधी गुट में अपेक्षाकृत कम आक्रामक नेता के तौर पर देखा जाता था।
बनिया बिरादरी से आने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय इंदर सिंगला राज्य इकाई के अध्यक्ष पद के लिए एक प्रमुख दावेदार माने जा रहे थे। वे वर्तमान में पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख हैं। हालांकि, अंत में परगट सिंह को चुना गया, जो 10 साल पहले कांग्रेस में शामिल होने से पहले शिरोमणि अकाली दल में थे; जबकि चर्चा में सुखजिंदर सिंह रंधावा (पूर्व उपमुख्यमंत्री), राणा केपी सिंह और सुखबिंदर सिंह सरकारिया जैसे अन्य जाट सिख नेताओं के नाम भी शामिल थे।
दलित समुदाय से आने वाले और सिख धर्म को मानने वाले चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी का सबसे प्रमुख चेहरा माना जाता है। वे कैंपेन कमेटी के प्रमुख हैं, यह पद उन्हें जुलाई में मिला था, हालांकि जब तक वड़िंग अध्यक्ष रहे, वे हाईकमान के फैसले से खुश नहीं रहे और खुलेआम इसका इजहार भी किया।
1 जुलाई के बाद पार्टी के अंदर खींचतान और बढ़ गई, जब हाईकमान ने घोषणा की कि वड़िंग राज्य इकाई के अध्यक्ष बने रहेंगे। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा भी इससे सहमत नहीं थे। रंधावा चन्नी का समर्थन करते दिखे।
5 सितंबर तक, दरारें व्यापक रूप से सामने आ गईं। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल की जगह राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को केंद्रीय प्रभारी के रूप में नियुक्त किया, जो 2025 की शुरुआत से इस पद पर थे और उन्हें वड़िंग के प्रति पक्षपाती माना जाता था। 15 सितंबर को, पायलट ने एक दलित व्यक्ति की मौत पर एक विरोध रैली का नेतृत्व किया, जहां चन्नी और वड़िंग ने लगभग तीन महीनों में पहली बार मंच साझा किया।
उसी कार्यक्रम में, बाजवा ने कहा कि पार्टी मुख्यमंत्री पद का चेहरा पेश किए बिना चुनाव लड़ेगी। 30 सितंबर को वड़िंग ने इस्तीफा दे दिया। दो दिन बाद, परगट सिंह को नया अध्यक्ष बनाने की घोषणा की गई।
यूपी की रामपुर खास सीट से तीन बार की विधायक मोना, राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। वह अजय राय की जगह लेंगी, जो 2023 से कांग्रेस की यूपी यूनिट के प्रमुख थे।
मोना और उनके पिता, दोनों को ही अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने नेतृत्व में हुए इस बदलाव का स्वागत किया है और आगामी चुनावों में मिलकर प्रचार करने की बात कही है।
मोना ने मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और गांधी परिवार का उन पर भरोसा जताने के लिए शुक्रिया अदा किया और भरोसा जताया कि उनकी पार्टी 2027 का चुनाव जीतेगी।
