जन – जीवन को वैज्ञानिक मानसिकता से जोड़ने पर मंथन

वैज्ञानिक मानसिकता को जन-जीवन से जोड़ने पर मंथन

  • कुरुक्षेत्र में ज्ञान-विज्ञान आंदोलन हरियाणा की दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

विज्ञान, वैज्ञानिक मानसिकता और समाज विषय पर ज्ञान-विज्ञान आंदोलन हरियाणा द्वारा 12-13 सितम्बर को यूथ हॉस्टल, पीपली, कुरुक्षेत्र में दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें कुरुक्षेत्र, अम्बाला, करनाल, पानीपत, सोनीपत, गुरुग्राम, मेवात, यमुनानगर जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करने, विज्ञान को समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने तथा अंधविश्वास और तथाकथित चमत्कारों के प्रति वैज्ञानिक समझ विकसित करने पर व्यापक चर्चा हुई।

कार्यशाला के प्रथम दिन उद्घाटन सत्र में गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। राज्य संयोजक, साइंस कोर समूह हरियाणा संदीप महिया ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों और रूपरेखा की जानकारी दी।

पहले विषय “विज्ञान और वैज्ञानिक मानसिकता” पर रिसोर्स पर्सन डॉ. महाबीर जागलान और प्रो. टी. आर. कुण्डू ने विचार रखा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मानसिकता केवल वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी होना नहीं है, बल्कि किसी भी बात को तर्क, प्रमाण और परीक्षण के आधार पर समझने की दृष्टि विकसित करना है। इसके बाद प्रतिभागियों ने समूहों में चर्चा कर अपने विचार साझा किए।

“विज्ञान और समाज” पर डॉ. राकेश शर्मा और प्रो. प्रमोद गौरी ने संबोधित किया। वक्ताओं ने विज्ञान और तकनीक के सामाजिक प्रभाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि तथा आम लोगों के जीवन से विज्ञान के संबंध पर चर्चा की। समूह चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों ने समाज की समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान और विज्ञान को जन-आंदोलन से जोड़ने के उपायों पर विचार किया।

एस्ट्रोनॉमी यानि खगोल विज्ञान पर रिसोर्स पर्सन कृष्ण वत्स और मैडम चित्रा ने विशेष सत्र में खगोलीय घटनाओं और ब्रह्मांड से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी दी गई तथा आकाश-दर्शन के माध्यम से ग्रहों को दिखाकर विज्ञान को रोचक और सहज ढंग से समझाने का प्रयास किया गया।

कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न गतिविधि आधारित सत्रों का आयोजन किया गया। रमेश चन्द्र और डॉ. पवन कुमार ने विज्ञान के सरल प्रयोगों के माध्यम से बताया कि वैज्ञानिक अवधारणाओं को प्रयोग और गतिविधियों के जरिए आम लोगों तथा बच्चों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

इसके बाद रिसोर्स पर्सन रण सिंह ने “चमत्कारों का पर्दाफाश” विषय पर गतिविधियों और प्रदर्शन के माध्यम से तथाकथित चमत्कारों के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझाया। प्रतिभागियों ने इस सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया।

जनता के बीच जाकर बताएं अनुभव

कार्यशाला के अंतिम सत्र में सुरेश कुमार ने “भविष्य की योजना” प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं का उद्देश्य केवल दो दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बल्कि कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान और अनुभव को अपने-अपने जिलों, कस्बों, गांवों, स्कूलों और समाज के विभिन्न वर्गों तक ले जाना आवश्यक है। इसके लिए नियमित विज्ञान संवाद, विज्ञान के सरल प्रयोगों के कार्यक्रम, अंधविश्वास विरोधी गतिविधियां, एस्ट्रोनॉमी कार्यक्रम, विज्ञान अध्ययन समूह तथा युवाओं और विद्यार्थियों के बीच विज्ञान संचार को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रत्येक जिले में प्रशिक्षित विज्ञान कार्यकर्ताओं की सक्रिय टीम तैयार करने, स्थानीय सामाजिक समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने तथा “स्थानीय समस्या—वैज्ञानिक समाधान” की भावना के साथ जनसंवाद बढ़ाने की आवश्यकता है।

जनजागरूकता अभियान चलाने का संकल्प

कार्यशाला में यह संकल्प लिया गया कि विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं और पुस्तकों तक सीमित न रखकर उसे आम जन के जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि और सामाजिक सरोकारों से जोड़ा जाएगा। वैज्ञानिक सोच, तर्कशीलता और प्रमाण आधारित दृष्टिकोण को मजबूत करने के लिए निरंतर जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। कार्यशाला में उपरोक्त के अलावा डॉ. रणबीर सिंह दहिया, मनीषा, वेदपाल, सुरेश गिरधर, प्रभु सिंह, जयपाल, सतीश कुमार, तरसेम, दयानन्द, राजेन्द्र सरोहा, डा. वी बी अबरोल, सुलेख चंद्र, दिनेश, ईश्वर, प्रो. मीनाक्षी, दीक्षा, मा. रणधीर, असीम, मनस्वी, सुनील रत्न, उषा, हंसराज,अनुपम शर्मा,नर सिंह मयूर, राजिंदर कौर, मनीष, रामकुमार सैनी, सुनीता, प्रीति, पिंकी आशा, कुसुम, मा रामेश्वर दास, सुखविंद्र आदि समेत करीब 70 कार्यकर्ताओं ने भारी उत्साह से भाग लिया.

अंत में कुरुक्षेत्र के जिला प्रधान मास्टर तरसेम सिंह व सचिव नरेश कुमार द्वारा सभी रिसोर्स पर्सन और प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का समापन हुआ।

रिपोर्टः सुरेश कुमार,राज्य सचिव, हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति ।

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