कविता
कैसी घिनौनी जनता हो तुम
मंजुल भारद्वाज
आज तुमने युवाओं
बच्चों के सपने छीन लिए
उनके भविष्य को बर्बाद कर दिया!
आज वो सड़क पर हैं
अपने अधिकार के लिए
और
सरकार उन्हें अपराधी समझ कर
पुलिस से लहुलुहान करवा रही है!
क्यों? कैसे हुआ यह ?
इसका कारण है धर्मांधता
धर्म ने अंधा कर दिया
भारतीय से आप हिन्दू हो गए
आस्था ने पूरे देश को
गटर में डूबो दिया!
नतीजा
सरकार किसी काम की जिम्मेदारी
लेने को तैयार नहीं
राम के नाम पर सत्ता हासिल करने वाले
राम को लूटने वाले
आज सारी मर्यादाओं को तार तार कर रहे हैं!
संविधान अब एक किताब भर रह गया है
न्यायपालिका सरकार की रबर स्टंप
चुनाव आयोग सरकार का चपरासी
मीडिया सरकार के जूते चाटता है!
क्यों ?
क्योंकि आप सरकार से सवाल नहीं करते
झूठ को चुनौती नहीं देते
आप अपने बच्चों के सपनों का क़त्ल कर
धर्मांध बन गए हो !
ना देश से कोई प्रेम है आपको
ना संविधान से
ना अपनी औलाद से
कैसी घिनौनी जनता हो तुम ?
