डॉ रीटा अरोड़ा की कविता – एक बेटी का यह सवाल

युवाओं, अब यह स्वतंत्रता की मशाल तुम्हारे हाथों में है। इसे केवल संभालना नहीं, और अधिक उज्ज्वल बनाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कह सकें - “हमारे पूर्वजों ने हमें आज़ादी दी थी, और हमने उस आज़ादी को सम्मान, एकता और कर्म से जीवित रखा।”

कविता

एक बेटी का यह सवाल-

“औरत ज़ात हूँ… क्या यही मेरा गुनाह है?”

डॉ रीटा अरोड़ा

 

माँ…

आज तुमसे एक सवाल पूछूँ?

जब मेरा जन्म हुआ था,

क्या उस दिन ही मेरी तक़दीर लिख दी गई थी?

क्या उसी पल तय हो गया था

कि मुझे दूसरों की ख़ुशियों के लिए जीना होगा?

 

क्योंकि…

मैं औरत ज़ात हूँ।

 

मुझे बचपन से सिखाया गया-

धीरे बोलो…

ज़्यादा मत हँसो…

सपने देखो, मगर सीमाओं के भीतर।

उड़ना चाहो तो पहले इज़ाज़त माँगो।

 

क्यों?

क्योंकि मैं औरत ज़ात हूँ।

 

भाई देर से घर आए तो “काम में होगा”,

मैं पाँच मिनट भी देर कर दूँ

तो सवालों की पूरी अदालत सज जाती है।

उसकी गलती… शरारत कहलाती है,

मेरी साँस भी कभी-कभी इल्ज़ाम बन जाती है।

 

क्यों?

क्योंकि मैं औरत ज़ात हूँ।

 

मैंने हर रिश्ते को दिल से निभाया,

अपनों के लिए ख़ुद को भुलाया।

अपनी इच्छाओं को चुपचाप मोड़कर,

दूसरों के सपनों को आकार दिया।

 

फिर भी…

 

हर मोड़ पर मेरी नीयत पर सवाल,

मेरे चरित्र पर उँगलियाँ,

मेरी आवाज़ पर पहरे…

जैसे भरोसा करने से पहले

मुझ पर शक करना ज़रूरी हो।

हर दहलीज़ पर सज़ाओं की दास्तान मिली,

जो बोल सकती थीं,

वही ज़ुबानें कटी मिलीं।

 

तब मेरे मन ने पहली बार पूछा-

क्या सचमुच

हम गुनहगार औरतें ही हैं?

या…

 

हमारी वफ़ा गुनाह है?

हमारा त्याग गुनाह है?

हमारा चुप रह जाना गुनाह है?

 

या हर बार टूटकर भी रिश्तों को जोड़ देना गुनाह है?

अगर प्रेम करना अपराध है,

तो सबसे बड़ी अपराधी माँ होती।

अगर समर्पण गुनाह है,

तो हर बहन दोषी होती।

अगर परिवार के लिए अपना जीवन जी देना अपराध है,

तो इस संसार की हर बेटी कटघरे में खड़ी होती।

 

फिर बताइए…

 

दोष हमारा है,

या वह सोच गुनहगार है

जो जन्म से पहले ही

एक बेटी के हिस्से में बंदिशें लिख देती है?

 

आज मैं विद्रोह नहीं कर रही,

बस उत्तर माँग रही हूँ।

 

मेरे वजूद का,

मेरे अस्तित्व का,

मेरी ख़ामोशी का।

 

एक बेटी का बस इतना-सा सवाल है-

“औरत ज़ात हूँ…

क्या यही मेरा गुनाह है?”

 

*~ डॉ. रीटा अरोड़ा, सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर, करनाल
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