रणबीर सिंह दहिया की कविता – आज और हम

कविता

आज और हम

रणबीर सिंह दहिया

विनाशकारी कदम ताबड़ तोड़ हमपे थौंप दिये

पेट्रोल के बाद डीजल के दाम नियन्त्रण मुक्त किये

देश भर में व्यापक विरोध हुआ फिर भी लागू करे

खुदरा व्यापार में सीधे विदेशी निवेश से नहीं डरे

लूट खसोट उत्पीड़न मुनाफा खोरी पे व्यवस्था टिकी

दिवालियेपन का संकट उभरने की खास नीतियां लिखीं

सुधारों की आड़ में बिगाड़ पूरे देश पे थोपे जा रहे

इनके विनाशकारी परिणाम अब सामने आ रहे

उदारीकरण निजीकरण की नीतियां लागू की गईं

साहू‌कारों को मुनाफे बढ़ाने की इजाजत दे दी गई

वहीं यहां पर रोटी रोजी को तरसते मजदूर किसान

छोटे कर्मचारी भी हो रहे इन नीतियों से परेशान

रोटी रोजी खाद्य की सुरक्षा शिक्षा स्वास्थ्य और आवास

बुनियादी जरूरतें बाजार से ना पूरी होने की आस

पढ़ाई महंगी द‌वाई बिन बेमौत ये मरते लोग

जमीन मकान बेच के इलाज खर्च भरते लोग

लाखों पढ़े लिखे योग्य युवा ढूंढते फिरते रोजगार

दूसरी तरफ लाखों नौकरी खाली रखे बैठी सरकार

अस्थाई नौकरियां देके ये स्थाई काम के पदों पे लगाते

आर्थिक शोषण उत्पीड़न करें बिल्कुल ना घबराते

महिला कमजोर तबके मान सम्मान से ना जी पाते

बलात्कार घरेलू हिंसा कदम कदम पर हैं सताते

दलित महिला सबसे ज्यादा शोषण का शिकार होती

दबंग शामिल रहते असफल गरीब की पुकार होती

जातिवादी आक्रमकता को दबंग बढ़ावा दे रहे हैं

सामाजिक सद‌ भाव बिगाड़ ये डरावा दे रहे हैं

कब तक आखिर यह सब हम आप सहते रहेंगे

कबतक ये सामाजिक उत्पीड़न हम और आप सहेंगे

जात पात से उभर के लडऩे की बात हो चुकी है दोस्तों

एक नई जंग की तो देखो शुरुआत हो चुकी है दोस्तों

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