जसवीर त्यागी की कविताएं – मनुष्यता और गलत होने से बच जाता है

जसवीर त्यागी की कविताएं – मनुष्यता और गलत होने से बच जाता है

1

मनुष्यता

एक समय बाद
चीज़ें खराब होकर टूटने लगती हैं
हम उनको तत्काल
बाहर फेंक नहीं पाते

अपने जीवन में उनकी उपयोगिता
और गुणवत्ता को
स्मृतियों की खूँटी पर बांधकर रखते हैं

धीरे-धीरे समय के सूर्य की तपिश तेज होती है
एक दिन हमें लगता है
टूटी हुई चीज़ को
ठीक नहीं किया जा सकता
वे अपना सर्वश्रेष्ठ
बहुत पहले हमें अर्पित कर चुकी हैं

और किसी दिन हम
टूटी हुई चीजों की निरर्थकता को निरखते हुए
मन के मकान से बाहर कर देते हैं

टूटी हुई चीजों को एक झटके से
बाहर नहीं कर पाते हम
काम न करने पर भी
कुछ दिनों तक चीजों को अपने पास रखते हैं

यह पास रखना ही
मनुष्यता को थोड़ा बचाकर रखना है।

2

गलत होने से बच जाता है

हड़बड़ी में एक दिन
मैंने कमीज़ पहनी
और सुबह की सैर पर निकल गया

घर-वापसी पर
मेरी पाँच वर्षीय बेटी ने कहा-
पापा क्या आप छोटे बच्चे हो?
मैं उसके सवाल के अर्थ को समझकर भी
उसके प्रयोजन को पकड़ नहीं सका
मैंने उससे पूछा
आप ऐसा क्यों कह रही हैं?

किसी होशियार बुजुर्ग की तरह
वह बोली-
आपकी शर्ट के बटन
छोटे बच्चों की तरह ऊपर-नीचे लगे हैं
क्या आपको बटन लगाना नहीं आता?

अपनी शर्ट के उल्टे-सीधे बटन देखकर
मैं छोटे बच्चों की तरह निर्दोष हँसी हँसा

और हँसते हुए सोचा
बेटियाँ होती हैं
तो जीवन में कितना कुछ
गलत होने से बच जाता है।

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