कविता
चलना ही होगा तुम्हें..!
ओमसिंह अशफ़ाक
चलना ही होगा तुम्हें बेशक कठिन है तुम्हारी ये डगर।
वहां घात लगाए बैठे हैं राह में कई घड़ियाल और मगर।
हिम्मत अगर छोड़ दी तुमने इस मुश्किल वक्त में।
बर्बाद होना तय है यह तुम्हारा बसा-बसाया नगर।
काफिले तो जुड़ ही जाएंगे कुछ देर से ही सही।
पहल कदमी तो करनी होगी किसी न किसी को मगर।
लिख तो दी है बर्बादी उसने तुम्हारे प्यारे चमन की।
डटना ही होगा मैदान में उसे बचाना चाहते हो अगर।
नहीं होता शॉर्टकट कोई कभी सच्ची कामयाबी का।
मुश्किल तो रहा है चलना हमेशा ही इंसाफ की डगर।
