कविता
मुल्क की गेल मखौल ना कर !
ओमसिंह अशफ़ाक
दिके दिन-धौली़ तू रौल़ ना कर !
म्हारे मुल्क की गेल मखौल ना कर !
कदि गुरबत में भी हम ना घबराए,
तू डर का खड़्या माहौल ना कर !
जो होगी वो भी देक्खी जागी,
तू दिल में म्हारे हौल ना कर !
हम सीध्धे-पाधरे सच के कायल,
तू बात्तां का हिंडौंल़ ना कर !
पिछले वादे तो तेरे झूठ्ठे निकले,
इब आग्गै टाल़-मटोल़ ना कर !
