बलबीर राठी की गजलों में सादगी और रवानगी का गजब तालमेल हैः ओमप्रकाश करुणेश
जींद में पूर्व प्राचार्य व गजलकार बलबीर सिंह राठी की तीन पुस्तकों का लोकार्पण समारोह

रविवार 17 मई 2026 को स्थानीय जाट धर्मशाला जींद में जनवादी लेखक संघ, ज्ञान विज्ञान समिति एवं सुमन व राठी परिवार के संयुक्त आयोजन में पूर्व प्राचार्य बलबीर सिंह राठी की तीन पुस्तकों (लहर-लहर,आबशार व आहंगे-गजल) का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व पुस्तकालयाध्यक्ष एवं अधिवक्ता विजय शर्मा ने की। मंच संचालन सोहनदास ने किया और स्वागत जलेस जींद के अध्यक्ष राममेहर सिंह खर्ब ने किया।
इस अवसर पर अपूर्वा, अंकित, चमन और आदर्श ने गज़लें सुनाईं। एक गजल के कुछ अशआर देखिये-
तुंद शोलों में डल गया हूं मैं
कोई सूरज निगल गया हूं मैं
मत बुलंदी की बात कर राठी
अब वहां से फिसल गया हूं मैं।
समारोह में कुरुक्षेत्र से पधारे पूर्व प्रिंसिपल ओमप्रकाश करुणेश ने बलबीर राठी की किताबों पर मुख्य समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि बलबीर सिंह राठी की गजलों में कहीं दुष्यंत कुमार की तो कहीं आबिद आलमी और फैज अहमद फैज की झलक दिखाई देती है। सादगी और रवानगी का तालमेल भी गजब का है बलबीर राठी की गजलों में। हादसों से जूझना और निकलना उनकी गजलों का मुख्य स्वर था। वे कहते हैं कि आज तो रहबर ही रहजन हैं।
राठी साहब की तीनों किताबों का उर्दू से हिंदी में तर्जुमा करने वाले शायर महावीर सिंह दुखी बीमारी की वजह से समारोह में उपस्थित नहीं हो पाये और अपना संदेश आडियो के माध्यम से भिजवाया। जिसे मंगतराम शास्त्री ने प्रस्तुत किया। दुखी साहब ने अपने संदेश में कहा कि बलबीर राठी तरक्की पसंद शायर थे लेकिन उनकी गजलों में नारेबाजी नहीं थी। उनकी गजलें समाज के दर्द और बेचैनी से सराबोर हैं।
डॉ इन्द्रजीत सिंह ने भी अपने अंदाज में राठी साहब की अनेक गजलों के अशआर व महावीर सिंह दुखी की गजलें सुनाई। राठी साहब की पुत्रवधु वर्षा ने भी अपनी बात रखी।
गुरुग्राम से आई पूर्व प्राचार्या प्रेम लता ने अपने अनुभव साझा किए।
ज्ञान विज्ञान समिति के राज्याध्यक्ष प्रमोद गौरी ने कहा कि गजल की शुरुआत बेशक इश्क से हुई है और इस परिपाटी को राठी साहब ने भी बखूबी निभाया लेकिन राठी साहब का इश्क आम जन से है जो उनकी गजलों में साफ झलकता है।
बलबीर राठी की पोती अपूर्वा ने बातचीत में अपने दादा जी की यादें ताजा कर दीं। उनकी बेटी सुमन ने भी अपनी बातें रखते हुए जनवादी लेखक संघ जींद और ज्ञान विज्ञान समिति जींद का आभार व्यक्त किया। अंत में राठी साहब के अजीज विजय शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए समारोह का समापन किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ कवि हरपाल गाफिल, डॉ सुरेश कुमार, मनीषा, जगमति सांगवान, डॉ सुदेश सिवाच, विकास अफराज, सुधीर नैन,एडवोकेट वीरेंद्र जे पी, एडवोकेट सत्येन्द्र कुमार,रामफल दहिया, आजाद जुलानी, विश्वेश्वर श्योकंद,रमेश मूर्ति, प्रमोद कुमार, जयप्रकाश लुदाना, अनिल कुण्डू, गुलाब सिंह, विक्रम राही, सुनील सीना, प्रवेश कुमार, विक्रम सिंह व राजकुमार श्योकंद सहित भारी संख्या में लेखकों, कलाकारों, कवियों व कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
