अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस
घर अब भी दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह है
जहाँ डाँट में भी प्यार है और चुप्पियों में भी अपनापन
डॉ. रीटा अरोड़ा
“मम्मी, आज सब लोग साथ में डिनर करेंगे ना?” बेटी ने उत्साह से पूछा।
माँ ने किचन से जवाब दिया – “पापा की मीटिंग है बेटा… तुम खाना शुरू करो।”
दादा टीवी की आवाज़ धीमी करते हुए बोले -“अब घरों में प्लेटें तो साथ लगती हैं… लेकिन वक्त साथ नहीं बैठता।”
कुछ पल के लिए पूरा घर शांत हो गया। शायद आधुनिक परिवारों की सबसे बड़ी दूरी अब दीवारों में नहीं, दिनचर्या में आ गई है।
आज, जब पूरी दुनिया 15 मई को ‘अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस’ मना रही है तो यह समय है रुककर मुस्कुराने का और अपने परिवार के उस अनस्क्रिप्टेड और अनफिल्टर्ड ड्रामा को गले लगाने का।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1993 में स्थापित यह दिन समाज में परिवारों के महत्व को रेखांकित करता है। आज का दौर ‘न्यूक्लियर’ यानी एकल परिवारों का है, जहाँ हम एक छोटी छत के नीचे रहते हैं, लेकिन हमारी भावनाएं और चुनौतियां बहुत व्यापक हैं। तकनीक ने हमें स्क्रीन के जरिए दुनिया से तो जोड़ा है, लेकिन एक ही सोफे पर बैठे परिवार के सदस्यों के बीच एक गहरा वैचारिक और डिजिटल अंतर (Digital Divide) भी पैदा कर दिया है।
आज के युवाओं (जेन ज़ी) की सबसे बड़ी चुनौती शायद यही है कि उनके पास “कनेक्शन” बहुत हैं, लेकिन “जुड़ाव” कम है। उनके पास हजारों फॉलोअर्स हो सकते हैं, लेकिन मुश्किल समय में कॉल करने के लिए बहुत कम लोग होते हैं। उनके पास जानकारी बहुत है, लेकिन भावनात्मक स्थिरता कम होती जा रही है। कई युवा आज एंग्जायटी, अकेलेपन और इमोशनल बर्नआउट जैसी समस्याओं से गुजर रहे हैं।
कारण सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं है। कारण यह भी है कि आधुनिक जीवन ने इंसान को “साझा जीवन” से धीरे-धीरे अलग कर दिया है।
जेन ज़ी युवाओं को समझना चाहिए कि परिवार सिर्फ खून का रिश्ता नहीं, बल्कि एक “इकोसिस्टम” है। उनके लिए परिवार वह “लंगर” है, जो सोशल मीडिया की बनावटी दुनिया के शोर के बीच उन्हें वास्तविकता की जमीन से जोड़े रख सकता है।
हमारे पिता (Gen X) अक्सर अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने में कंजूस होते हैं। उनका प्यार “मैं तुम्हारी उम्र में…” वाले लंबे भाषणों, आपकी बाइक की चुपचाप सर्विसिंग करा देने, या दफ्तर से लौटते वक्त बिना मांगे आपकी पसंद की मिठाई ले आने में छिपा होता है। वे अनुशासन की वह नींव हैं, जिनके बिना घर का ढांचा बिखर सकता है। वहीं, हमारी दादी-नानी ‘इमोशनल ब्लैकमेल’ की उस्ताद होती हैं, लेकिन उनकी कहानियों और घरेलू नुस्खों में वह जादू है जो गूगल के पास भी नहीं है। वे परिवार की वे जड़ें हैं, जो नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति की महक से जोड़े रखती हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने 2026 के लिए “परिवार, असमानताएं और बाल कल्याण” की थीम निर्धारित की है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि जब परिवार संकट में होता है तो पूरी मानवता का भविष्य खतरे में पड़ जाता है। इसीलिए बाल लाभ, पैतृक अवकाश और सस्ती चाइल्डकैअर जैसी नीतियां केवल सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज की सबसे छोटी इकाई ‘परिवार’ को बचाने के अनिवार्य हथियार हैं।
हमें समझना होगा कि एक ‘मकान’ ईंट, सीमेंट और किश्तों से बनता है, लेकिन एक ‘घर’ भावनाओं, आपसी समझ और ‘सॉरी’ कह देने की हिम्मत से बनता है। आजकल हम आलीशान फ्लैट्स में तो रहने लगे हैं, जहाँ प्राइवेसी तो बहुत है, लेकिन वह ‘अपनापन’ कम होता जा रहा है जो पुराने आंगन वाले घरों में होता था। पारिवारिक जीवन की कुछ अपनी जटिलताएं भी होती हैं – जैसे ‘लोग क्या कहेंगे’ का दबाव या शादी का निरंतर सवाल – लेकिन याद रखिए, जब पूरी दुनिया आप से आंखें फेर लेती है, तब यही ‘दबाव डालने वाले’ लोग आपकी ढाल बनकर खड़े होते हैं।
*युवाओं के लिए संदेश*: परिवार को ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ न लें। याद रखें कि आपके माता-पिता के पास आपकी तरह रील्स देखने का विकल्प नहीं था, उन्होंने अपना समय आपको पालने में निवेश किया है। फोन किनारे रखें और उनके अनुभव सुनें।
*अभिभावकों के लिए संदेश*: संवाद का द्वार खुला रखें। परिवार को ‘तानाशाही’ से नहीं, बल्कि ‘दोस्ती’ से चलाएं। बच्चों की नई सोच को ‘विद्रोह’ नहीं, बल्कि ‘बदलाव’ के रूप में स्वीकारें।
*वरिष्ठ नागरिकों के लिए संदेश*: अपनी विरासत और मूल्य प्यार से सौंपें, अधिकार से नहीं।
अंततः, जैसा कि कहा गया है, *”परिवार कोई महत्वपूर्ण चीज़ नहीं है; यह सब कुछ है।”* अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस पर संकल्प लें कि हम अपने घर को सिर्फ एक पता (Address) नहीं, बल्कि एक सुरक्षित ठिकाना बनाएंगे। परिवार केवल खून का रिश्ता नहीं, मानसिक सुरक्षा का वह स्थान है जहाँ इंसान बिना मुखौटे के रह सकता है। आज शाम फोन म्यूट करें, सबके साथ बैठकर चाय पिएं और उन छोटी-छोटी नोक-झोंक का आनंद लें, क्योंकि यही वह ‘अनफिल्टर्ड ड्रामा’ है जो जीवन को जीने लायक बनाता है।
*आप सभी को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!*
