जनार्दन ज्ञानोबा नवले :साहस का प्रतीक विकेटकीपर 

भूले बिसरे खिलाड़ी

जनार्दन ज्ञानोबा नवले : साहस का प्रतीक विकेटकीपर

“नंगे पैर प्रैक्टिस, फौलादी हौसला और भारत का पहला टेस्ट रन!”… मिलिए उस खिलाड़ी से जिसने टीम इंडिया की ऐतिहासिक यात्रा शुरू की! विकेटकीपर

जब भी भारतीय क्रिकेट के ‘इतिहास’ की बात होगी, जनार्दन ज्ञानोबा नवले का नाम सुनहरे अक्षरों में लिया जाएगा। वह केवल एक विकेटकीपर नहीं थे; वह उस साहस का प्रतीक थे जिसने भारतीय क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

1. इतिहास की पहली गेंद (The Face of History):

25 जून 1932। लॉर्ड्स का मैदान। जब भारत अपने जीवन का पहला टेस्ट मैच खेलने उतरा, तो स्ट्राइक पर कौन था? वह थे जनार्दन नवले!

उन्होंने इंग्लैंड के खतरनाक गेंदबाज बिल बोवेस की पहली गेंद का सामना किया और भारत के लिए पहला टेस्ट रन बनाया। इतिहास के पन्नों में यह श्रेय हमेशा उनके नाम रहेगा।

2. बिजली जैसी फुर्ती (Lightning behind the Stumps):

नवले अपनी विकेटकीपिंग में इतने फुर्त थे कि अंग्रेज भी दंग रह गए। 1932 के उस दौरे पर उन्होंने कुल 115 विकेट झटके (कैच और स्टंप्स मिलाकर)। विजडन ने उन्हें “एक ऐसा खिलाड़ी जिसकी सजगता और तकनीक विश्व स्तरीय है” कहकर सराहा। उनके दस्ताने (Gloves) गेंद को ऐसे पकड़ते थे जैसे कोई चुंबक हो!

3. अभावों में बीता जीवन (The Struggle):

नवले की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही भावुक भी। एक दौर ऐसा था जब इस महान खिलाड़ी के पास जूते खरीदने के पैसे नहीं थे और वह नंगे पैर ही अभ्यास किया करते थे। अपने आखिरी दिनों में उन्होंने काफी गरीबी देखी और पुणे में एक सुरक्षा गार्ड (Security Guard) के रूप में भी काम किया। यह सुनकर आज भी हर क्रिकेट प्रेमी की आँखें नम हो जाती हैं।

4. “नन्हा जादूगर” (The Little Dynamo):

कद में छोटे होने के कारण उन्हें अक्सर ‘नन्हा’ कहा जाता था, लेकिन मैदान पर उनकी मौजूदगी विशाल थी। उन्होंने भारत के लिए केवल 2 टेस्ट खेले, लेकिन घरेलू क्रिकेट और दौरों पर उनका दबदबा ऐसा था कि महान सी.के. नायडू भी उन पर अटूट भरोसा करते थे।

क्या आपको नहीं लगता कि जनार्दन नवले जैसे नायकों की कहानियों को आज की पीढ़ी तक और भी गर्व के साथ पहुँचाया जाना चाहिए?

देसी वाला क्रिकेट फेसबुक वॉल से साभार 

 

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