हरियाणाः जुझते जुझारू लोग-105
हुडा कर्मचारियों से सर्वकर्मचारी संघ तक का काम किया – प्रेमसिंह घिलोड़िया
सत्यपाल सिवाच
2 अप्रैल 1965 को तत्कालीन रोहतक जिले की गोहाना तहसील के गांव राणा खेड़ी में श्रीमती शान्ति देवी और गंगाराम के घर जन्मे प्रेमसिंह उन कार्यकर्ताओं में शामिल रहे हैं जो निरन्तरता में सक्रिय हैं। उनके पिता जी नहर विभाग में मेट पद पर कर्मचारी रहे। फिलहाल उनका परिवार मकड़ौली टोल प्लॉजा के पास रोहतक में रहता है। वे छह भाई-बहन हैं। बड़े भाई राममेहर डिप्टी डी.ए. पद से रिटायर हुए हैं और छोटा रामपाल सिंह भिवानी में स्टेम्प वेंडर का काम करता है। प्रेम सिंह ने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त की है।
शिक्षा प्राप्ति के बाद वे 5 नवम्बर 1991 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में ट्यूबवेल ऑपरेटर नियुक्त हो गए और 30 अप्रैल 2023 को सेवानिवृत्त हुए। वे नौकरी में आने के कुछ समय बाद ही संगठन में सक्रिय हो गए थे। वे हुडा जनस्वास्थ्य कर्मचारी यूनियन – 1266 मुख्यालय पंचकूला के सदस्य रहे। इस यूनियन जिला सचिव व प्रधान, सर्कल सचिव व प्रधान तथा राज्य में प्रेस सचिव पदों पर रहे। बाद के दौर में वे हुडा वर्करज यूनियन – 550 मुख्यालय पंचकूला में सम्मिलित हो गए। इस यूनियन में रोहतक सर्कल के प्रेस प्रवक्ता, प्रांतीय उपप्रधान, उपमहासचिव तथा रोहतक सर्कल के चीफ पैटर्न रहे।
प्रेम सिंह घिलोड़िया सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा में भी खण्ड स्तर से राज्य स्तर तक लगातार सक्रिय रहे। वे रोहतक खण्ड के सहसचिव व सचिव, जिला स्तर पर सदस्य, प्रेस सचिव और कोषाध्यक्ष भी रहे। उन्हें राज्य स्तर पर भी केन्द्रीय कमेटी सदस्य बनाया गया।
प्रेम सिंह अपने यूनियन आने के अनुभवों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि शुरू में अधिकारियों की तानाशाही के खिलाफ यूनियन में काम करने की जरूरत महसूस हुई थी। अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए संगठन आवश्यक है। बाद में सेवाएं नियमित किए जाने की मांग के चलते संगठन के प्रति आस्था गहरी हुई। सर्व कर्मचारी संघ बनने के बाद अर्धसरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन लागू करवाने का संघर्ष भी जीवन में यूनियन की जरूरत के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। संगठन में काम करते हुए मुख्य संघर्ष तो सर्वकर्मचारी संघ के झंडे तले ही लड़े गए। सभी संघर्षों में लगातार शिरकत की। अनेक बार गिरफ्तार हुए, लेकिन छोड़ दिए जाते रहे। हड़ताल के एवज में वेतन काट लिया जो बाद में मिल गया। एक दो बार ए.सी.आर. खराब की गई लेकिन संगठन के प्रयास से ठीक हो गई।
वे कहते हैं कि सर्वकर्मचारी संघ के साथ आने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। बहुत सा सांगठनिक-राजनीतिक ज्ञान मिला ; संगठन व संघर्ष के प्रति आत्मविश्वास बढ़ा और नौकरशाहों की मनमानी पर रोक लगी। वे याद करते हैं कि संगठन के कार्यों में व्यस्त होने पर परिवार से सहयोग और समर्थन मिला। क्योंकि इससे उनका दायरा और प्रतिष्ठा भी बढ़ रही थी। किसी नेता या अधिकारी से निजी घनिष्ठता तो नहीं रही लेकिन संगठन के प्रभाव के कारण परिचय रहा। कभी निजी कार्य या स्वार्थ के उनका फायदा नहीं लिया। कर्मचारियों के कार्यों के लिए जाने में कोई संकोच नहीं हुआ।
प्रेम सिंह वर्तमान समय के कार्यकर्ताओं को सलाह देना चाहते हैं कि सबसे पहले ड्यूटी ईमानदारी से निभाएं। उन्होंने कभी अपने कर्तव्य पालन में कोताही नहीं बरती। रात को ड्यूटी करते और दिन में टीम के साथ यूनियन का काम करते। साथ में घरेलू कामों से सन्तुलन बनाए रखते। वे जीवन में ईमानदारी को काफी जरूरी मानते हैं। आज के हालात पर चिंता प्रकट करते हुए वे कहते हैं कि पहले रेग्युलर कर्मचारी ज्यादा थे। अब वह संख्या घट गई है। उसकी तुलना में संघर्ष कम आक्रामक हैं। इसके लिए ठोस योजना बनाने की जरूरत है।
परिवार में उनकी जीवन साथी सुशीला हैं जो पार्लर चलाती हैं। बेटा पंकज घिलोड़िया बहादुरगढ़ स्थित शूज कंपनी में सीनियर मर्चेंडाइजर है और बेटी खुशबू हुंडई कंपनी में एच.आर. मैनेजर हैं। (सौजन्य: ओमसिंह अशफ़ाक)

लेखक : सत्यपाल सिवाच
