छोटे लम्हे, बड़ी सीख (5)

घर परिवार

छोटे लम्हे, बड़ी सीख (5)

डॉ रीटा अरोड़ा

1. इंतज़ार का दरवाज़ा

माँ हर शाम दरवाज़े की आहट सुनते ही उठ जाती थीं, चाहे बेटा आए या नहीं।

सीख*: कुछ इंतज़ार कभी खत्म नहीं होते, बस आदत बन जाते हैं।

 

2. *अधूरी बात*

दादा कुछ कह रहे थे, पोता फोन में व्यस्त था। दादा चुप हो गए-बात अधूरी रह गई।

*सीख:* कभी-कभी हमारी व्यस्तता किसी का दिल तोड़ देती है।

 

3. *चाय का कप*

पिता रोज़ दो कप चाय बनाते थे, जबकि अब घर में सिर्फ वो अकेले थे।

*सीख:* आदतों में भी अपनों की कमी झलकती है।

 

4. *पुरानी किताब*

एक किताब के बीच में सूखा फूल मिला। माँ ने कहा-“ये तुम्हारे पापा ने दिया था, जब हम पहली बार मिले थे।”

*सीख:* छोटी-छोटी यादें ही रिश्तों को जिंदा रखती हैं।

 

5. *देर से आया मैसेज*

माँ ने सुबह “खाना खा लिया?” भेजा, जवाब रात को आया—“हाँ।” माँ तब तक सो चुकी थी।

*सीख:* जवाब जल्दी देना भी रिश्तों की इज़्ज़त है।

 

6. *पुराना नंबर*

फोन में एक नंबर सालों से सेव था-कॉल कभी नहीं लगती थी, फिर भी डिलीट नहीं किया।

*सीख*: कुछ रिश्ते खत्म नहीं होते, बस चुप हो जाते हैं।

 

7. *धीमी आवाज़*

पिता धीरे-धीरे बोलने लगे थे, बेटा चिढ़कर बोला-“जोर से बोलो!”

पिता चुप हो गए।

*सीख*: उम्र के साथ आवाज़ नहीं, हमारा धैर्य कम हो जाता है।

 

8. *अनदेखा त्यौहार*

घर में त्योहार आया, पर सबने बस सोशल मीडिया पर ही शुभकामनाएँ दे दीं। घर में वही पुरानी खामोशी रही।

*सीख:* त्योहार दिलों को जोड़ने के लिए होते हैं, सिर्फ पोस्ट करने के लिए नहीं।

 

 

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