विभिन्न विचारों व दृष्टिकोणों को व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए : न्यायमूर्ति नागरत्ना

विभिन्न विचारों व दृष्टिकोणों को व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए : न्यायमूर्ति नागरत्ना

  • सुप्रीम कोर्ट की जज ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के संस्मरण ‘‘दि कांस्टीट्यूशन इज माई होम’’ का विमोचन किया

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी.वी. नागरत्ना ने बृहस्पतिवार को कहा कि भिन्न-भिन्न विचारों और दृष्टिकोणों पर विचार किया जाना चाहिए और उन्हें व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति नागरत्ना वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के संस्मरण ‘‘दि कांस्टीट्यूशन इज माई होम’’ के विमोचन के अवसर पर बोल रही थीं।
उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है। विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों पर विचार किया जाना चाहिए और उन्हें व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए।”
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था लेकिन वह कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके।
उन्होंने पुस्तक विमोचन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए एक वीडियो क्लिप भेजा और ‘ब्रिक्स’ न्यायाधीशों की आगामी बैठक के कारण उपस्थित नहीं होने पर खेद जताया।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि जयसिंह हाशिए पर पड़े समुदाय से संबंधित मुद्दों को उठाने में अग्रणी रही हैं।
उन्होंने कहा, “पुस्तक का शीर्षक बहुत कुछ कहता है। ज्यादातर वकील किसी मामले के दौरान कभी-कभार या नियमित रूप से संविधान का अध्ययन करते हैं, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि जयसिंह ने इसे अपना स्थायी निवास बना लिया है

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