हठी डोनाल्ड ट्रम्प की धोखेबाज़ी
राजकुमार कुम्भज
रूस के साथ डीज़ल समझौते के सिलसिले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समय वैश्विक आलोचनाओं के भारी दबाव में आ गए हैं.हठी डोनाल्ड ट्रम्प को कूटनीतिकतौर पर धोखेबाज़ तक बताया जा रहा है.
डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि रूसी रिफ़ाइनरियों से हासिल होने वाला ईंधन,वैश्विक तेल-बाज़ार में अवश्य ही स्थिरता लाएगा,जो कि अभी ऊॅंची क़ीमतों की वज़ह से प्रभावशील बना हुआ है.
यहाँ यह देखना दिलचस्प हो सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसी माह अर्थात् नौ अक्टूबर को ऐलान किया था कि अभी तीन लाख टन,फिर नवम्बर में पाँच लाख टन और इसके तुरंत बाद दस लाख टन डीज़ल की आपूर्ति रूस से दुनिया के तेल-बाज़ारों में की जाएगी.( नहीं,दुनिया के नहीं,सिर्फ़ यूरोपीय तेल-बाज़ारों में तेल-आपूर्ति की जाएगी.)
इधर इटली की प्रधानमंत्री जार्ज़िया मैलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को घेरते हुए आरोप लगाया है कि रूस-अमेरिकी डीज़ल समझौता,रूस-यूक्रेन शांति-वार्ता के मध्य दोस्ताना-व्यवधान साबित होगा.दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के विरुद्ध ड्रोन-हमले लगातार जारी हैं.डोनाल्ड ट्रम्प दुनिया को धोखा दे रहे हैं.
जार्ज़िया मैलोनी के आरोपों को ख़ारिज़ करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि नहीं,ऐसा नहीं है.इस रूसी-अमेरिकी डीज़ल समझौते से यूरोपीय तेल-बाज़ारों में तेल-आपूर्ति का विस्तार होगा.अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बचाव में ज़ोर देते हुए ये भी कहा है कि इस समझौते के तहत की जाने वाली डीज़ल-आपूर्ति अमेरिका के लिए नहीं है.
लेकिन भारत अगर रूस से तेल की आपूर्ति करता है,तो बदले में अमेरिका की ओर से भारत पर भारी-भरकम टैरिफ़ थोप दिया जाता है और ये वही अमेरिका खुल्लमखुल्ला रूस से यूरोप के लिए तेल-आपूर्ति का ऐलानिया समझौता करता है,जिससे यूक्रेन में तनाव बढ़ता है.
याद रखना चाहिए कि ये रूस-अमेरिकी डीज़ल-आपूर्ति समझौता,रूस-यूक्रेन-युद्ध के जारी रहते हुए हुआ है.एक तरफ़ तो यूक्रेन को युद्ध रोक देने की ख़ातिर शांति-वार्ता का प्रस्ताव दिया जाता है और दूसरी तरफ़ यूरोपीय-देशों को बिना किसी शर्म और शर्त के तेल-आपूर्ति समझौते का तोहफ़ा दे दिया जाता है.इस दोहरेपन को क्या कहा जाए?
भारत पर सौ फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने की अमेरिकी संसदीय-स्वीकृति पर राष्टृपति डोनाल्ड ट्रम्प हस्ताक्षर कर चुके हैं.भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना चरम-परम मित्र बताने के बावजूद डोनाल्ड ट्रम्प ने ये हरक़त की है और यही हरक़त उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ दोहराई है.डोनाल्ड ट्रम्प वाक़ई क़माल के हठी और धोखेबाज़ शख़्स साबित हो रहे हैं.
यूक्रेन पर रूस के ताज़ा हमलों के बाद जेलेंस्की ने ट्रम्प की निंदा करते हुए आरोप लगाया है कि ट्रम्प धोखेबाज़ हैं.रूस के ये ताज़ा हमले न सिर्फ़ अपमानजनक और निंदनीय हैं,बल्कि मानवाधिकार क़ानूनों के ख़िलाफ़ भी हैं.ज़ाहिर है कि ट्रम्प,यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को नापसंद करते हैं.
कहना कठिन है कि यूक्रेन पर रूस के ताज़ा हमलों से तेल-बाज़ारों की क़ीमतों में वृद्धि नहीं होगी?
रूस-अमेरिकी डीज़ल समझौते से होगा यही कि रूस-यूक्रेन के मध्य शांति-वार्ता तो प्रभावित होगी,किन्तु तेल क़ीमतों का विस्तार पूर्ववत ही होता रहेगा. दुनिया ये भी देखती रहेगी कि अपने लिए आठ नोबेल शांति पुरस्कारों की मांग या भीख के आकांक्षी,बेहद शर्मनाक कुख्याति की हद तक वैधता-मुक्त त्रस्तता-आग्रही डोनाल्ड ट्रम्प,कितना अज़ब-गज़ब संधि-समझौता कर सकते हैं?
जेलेंस्की ने यूरोपीयन नेताओं को एक बार फिर असली नेता बताते हुए शिक़ायत दर्ज़ करवाई है कि अब हमें अमेरिका से पहले जैसी महत्वपूर्ण व स्तरीय गुप्तचर सूचनाऍं नहीं मिल रही हैं.
रूस-अमेरिकी डीज़ल आपूर्ति समझौता धोखा देने वाली एक नयी वास्तविकता है.इससे न तो तेल की क़ीमतें प्रभावित होंगी और न यूक्रेन को युद्ध-विरूद्ध शांति-वार्ता के लिए निकट ही लाया जा सकेगा.
तो क्या हठी डोनाल्ड ट्रम्प की कूटनीतिक-धोखेबाज़ी इसी तरह अपने रॅंग बदलती रहेगी और शांतिप्रिय दुनिया यथावत ठगाती रहेगी?
17.10.26
