Blogसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

समय की शिराओं में धड़कती कविता : जयपाल का काव्य-संसार

पुस्तक समीक्षा समय की शिराओं में धड़कती कविता : जयपाल का काव्य-संसार प्रतिरोध, पुनर्सृजन और मानवीय अस्मिता का विमर्श  …

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जयपाल की चार कविताएं -कामरेडों के अंग-संग

जयपाल की चार कविताएं -कामरेडों के अंग-संग (1) कामरेड की गठरी   ज्ञान की गठरी का पहाड़ जिसे न कभी…

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जयपाल की कविता जिंदगी का सूरज व अन्य तीन कविताएं 

जयपाल की कविता जिंदगी का सूरज व अन्य तीन कविताएं 1 जिंदगी का सूरज   खिलखिलाते खेलते बच्चे हवा, धूप,…

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जयपाल की दो लघुकथाएँ

जयपाल की दो लघुकथाएँ लघुकथा-1  आंटियां   सब्जी वाला आता।गली की औरतें रेहड़ी घेर लेती।सब्जी में मीन-मेख निकालती..किसी सब्जी को…

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दलित समाज की पीड़ा को व्यक्त करतीं कविताएं

पुस्तक समीक्षा दलित समाज की पीड़ा को व्यक्त करतीं कविताएं मंजीत सिंह पिछले दिनों हरियाणा के चर्चित कवि जयपाल जी…