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ओमसिंह अशफ़ाक की कविता- जाति, धर्म और प्यार-2

कविता जाति, धर्म और प्यार-2 ओमसिंह अशफ़ाक कैसा तो ये राज है, कैसा है कानून । प्रेम तो मंहगा हुआ,…