अजय शुक्ला की बेतुकी बातें 6 – सिरम्मन की थोड़ी सी पत्रकारिता

बेतुकी बातें: 6- सिरम्मन की थोड़ी सी पत्रकारिता

अजय शुक्ला

 

सिरम्मन: सोचता हूं कि आज थोड़ी पत्रकारिता कर लूं….

झम्मन: क्यों? सच्चा व्यंग्य लिखने से डरने लगे हो क्या?

सिरम्मन: टॉक सेंस, आयम सीरियस।

झम्मन: लिख पाओगे, सीरियस और सच्ची खबरें?

सिरम्मन: बिलकुल। मैं विदेशी खबरें बताऊंगा। उनमें कैसा डर?

झम्मन: देख समझ के काम करना। कहीं ऐसा न हो कि एक्ट्राडिशन ट्रीटी हो किसी देश से।

सिरम्मन: इतना नहीं डरा जाता, झम्मन। जब तक जीवन है, मौत का खतरा बना रहेगा। मौत के डर से आत्महत्या कर लूं क्या?

झम्मन: नहीं भाई। मरे तेरे दुश्मन। तू खबर तो बता।

सिरम्मन: रंजिनी श्रीनिवासन को जानते हो?

झम्मन: होगी कोई मद्रासी। नाम तो वैसा ही लग रहा है।

सिरम्मन: बहुत अच्छे! तुम तो बने बनाए एप्रिल फूल हो। लेकिन तुम क्या करो! तुम्हें कोई बताएगा तभी तो जानोगे!!

झम्मन: बताओ

सिरम्मन: यह भारतीय लड़की अमेरिका में पीएचडी कर रही थी। अमेरिकी सरकार ने उसका वीज़ा रद्द कर दिया। उसे किसी तरह भाग कर कनाडा जाना पड़ा।

झम्मन: उसको इंडियन एंबेसी जाना चाहिए था। भारत सरकार ने क्या किया?

सिरम्मन: उसने किसी की मदद नहीं मांगी। भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि लड़की ने अप्रोच ही नहीं किया।

झम्मन: ठीक बात। अब भारत सरकार क्या करे। भाई जब मदद मांगोगे, तभी तो मदद की जाएगी! आगे क्या हुआ?

सिरम्मन: कुछ नहीं। अखबार में लिमिटेड जगह होती है। कितना छापें? फिर हिन्दी के अखबार भला हिन्दी विरोधी मदरासियों की खबर क्यों परसू करें? लेकिन ग़ज़ब यह कि जिस अमेरिकी सरकार ने वीज़ा छीना, वहां के निवासी इस घटना को भूल नहीं पा रहे।

झम्मन: तुम्हें कैसे पता?

सिरम्मन: मुझे ऐसे पता कि मेरे साथी Allan Mossbarger ने इस लड़की पर पोस्ट किया है। पोस्ट की हेडिंग है:

Who will remain to speak up for you

इतना ही नहीं उन्होंने सीएनएन के साथ लड़की की बातचीत की वीडियो क्लिप भी लगाई है। साथ में कैप्शन दिया है: Read aloud and weep for the loss of our rights

झम्मन: मुझको भी दिखाओ

सिरम्मन: यहां बातचीत के बीच नहीं। कमेंट सेक्शन में डाल दूंगा।

झम्मन: बस एक खबर! हो गई पत्रकारिता?

सिरम्मन: एक और सुनो। अमरीका में अनेक संगठनों ने पांच अप्रैल को देशव्यापी रैलियों, जुलूसों आदि प्रदर्शनों का आह्वान किया है।

झम्मन: ये अमेरिका वाले पगला गए हैं क्या? अच्छा खाते कमाते हैं। इतना अच्छा राष्ट्रपति मिला है। कनाडा, ग्रीनलैंड पर कब्जा करने वाला है। फिलस्तीन को रिविएरा बनाने जा रहा है। ऐसे आदमी का विरोध तो राष्ट्रद्रोह हुआ! आखिर दिक्कत क्या है इन बेवकूफों को? जिस आदमी ने भारत छोड़ पूरी दुनिया को हिला दिया, उसका विरोध! धिक्कार है। वहां भी वामी पहुंच गए क्या?

सिरम्मन: थोड़ा खुद भी पढ़ा करो। मैं कोई अखबार नहीं छाप रहा। वैसे, कहो तो एक खबर और बता दूं?

झम्मन: बताओ

सिरम्मन: ट्रंप ने एक और एग्जेक्युटिव ऑर्डर दिया है। इसमें उन्होंने smithsonian institutions की खबर लेने को कहा है। उपराष्ट्रपति से बोले हैं कि जाओ, जाकर अनुचित, विभाजनकारी, अमेरिका विरोधी विचारधारा को नेस्तनाबूद कर दो।

झम्मन: क्या इन इंस्टीट्यूशनों में देशद्रोह की ट्रेनिंग होती है?

सिरम्मन: मैं क्या कहूं? मैं तो यही मानता हूं कि अगर राजा को प्रजा का सांस लेना भी खराब लगे तो वह भी देशद्रोह है। विष्णु का अवतार होता है राजा!

झम्मन: वैसे ये संस्थान करते क्या हैं?

सिरम्मन: इनके बीस से भी ज्यादा म्यूजियम हैं, जहां अमेरिकी इतिहास से जुड़ी चीजें और दस्तावेज संग्रहीत हैं।

झम्मन: ये चीजें डरावनी हैं क्या?

सिरम्मन: भूत हमेशा डरावना होता है। अमेरिका की रातें आज भी काले अफ्रीकियों के भूतों की मर्मवेधी चीत्कार से सहमती रहती हैं। अफ्रीकियों के अलावा रेड इंडियंस के भूत भी हैं। Wounded knee नाम सुना है कभी?

झम्मन: तो इन म्यूजियमों में ये सारे भूत हैं। अमेरिकी सरकार को इन चीखों में बगावत की बू आती होगी। बड़ा कठिन होता है सरकार चलाना।

सिरम्मन: अब बस। आज के लिए इतना ही। कल empathy classes की खबर सुनाऊंगा। एम्प्थी का अर्थ पता करके रखना।

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