विजयी भव: / निर्भय भव
नेहासिंह राठौर और ABP न्यूज़ चैनल.
राजकुमार कुम्भज
नेहासिंह राठौर एक सुप्रसिद्ध,सम्मानित व सृजनशील भोजपुरी जय लोकगीत गायिका हैं और ABP न्यूज़ चैनल का पूरा नाम “आनंद बाज़ार पत्रिका”है.
आनंद बाज़ार पत्रिका वह अख़बार समूह है,जिसकी ख्याति कभी सत्य की सत्ता के लिए देशभर में सर्वाधिक सर्वोपरि रहा करती थी.आनंद बाज़ार पत्रिका समूह के पत्र-पत्रिकाओं में छपनेवाले समाचार को विश्वसनीय और सत्य स्वीकार कर लिया जाता था.जो ख़बर यहाॅं नहीं है,वह ख़बर तो हो सकती है,लेकिन भरोसे लायक ख़बर नहीं है.
जिस अख़बार समूह को देश के साक्षर नागरिकों-पाठकों ने कभी इस हद दर्ज़े तक सिर माथे लगाकर अपना हमसफ़र-हमराज़ बनाया था, आज उसीने इसी 18 अक्टूबर को नेहासिंह राठौर की फ़ोटो लगाते हुए एक ऐसी सर्वथा असत्य ख़बर प्रसारित कर दी कि जिससे देश एक ही झटके में सन्न रह गया.
ख़बर चलाई गई थी कि नेहासिंह राठौर वाले हॉस्टल में सेक्स रैकेट? पुलिस ने मारा छापा!
उक्त चैनल ने तब तक कम से कम ये तो पता कर ही लिया होगा और बहुत संभव है कि 18 अक्टूबर को नेहासिंह राठौर ने नवरात्रि-पर्व की महाअष्टमी का व्रत-उपवास भी किया ही। ABP बता सकता है कि पूजा-पाठ के उन्हीं पवित्र दिनों में ऐसी अपवित्र तथा असत्य ख़बर का प्रसारित होना,परिजनों,प्रशंसकों और समूचे पत्रकार-जगत के लिए कितना पीड़ादायक तथा त्रासदायक रहा होगा?
इस सनसनीखेज ख़बर में नेहासिंह राठौर की बाक़ायदा फ़ाइल-फ़ोटो सहित पुलिस-छापे का विस्तृत विवरण भी दिया गया था,जो कि नितांत निंदनीय,नितांत शर्मनाक और नितांत असत्य तो था ही,महिलाओं के प्रति घनघोर अपमानजनक व जुगुप्सा जगाने वाला भी था.
नेहासिंह राठौर द्वारा फ़ोन करने पर ABP न्यूज़ चैनल ने यह कहते हुए संक्षिप्त-क्षमा माँग ली कि उक्त जानकारी तथ्यों के आधार पर ग़लत पाई गई.इतिश्री?
अभी-अभी दो-तीन बरस पहले ही नेहासिंह राठौर का विवाह हुआ है.सभी जानते और मानते हैं कि दाम्पत्य-जीवन के प्रारंभिक परीक्षा-काल में इस तरह की प्रायोजित,किन्तु कुंठित ख़बर के दुष्प्रचार से निकलने वाले दुष्प्रभाव व दुष्परिणाम किस हद तक,कितने प्राणघातक हो सकते हैं?
ABP के प्रमुख कर्ताधर्ता रजनीश आहूजा ( पूर्व संचालक अभिजीत सरकार ) का ये तौर-तरीक़ा निहायत ग़ैर-ज़िम्मेदार और ग़ैर-मानवीय साबित हुआ है,जब वे समाचार-पीड़िता नेहासिंह राठौर को कोई भी सांत्वना-संतोष देने की बजाय,बद्तमीज़ी दिखाते हुए फ़ोन काट देना पसंद करते हैं?
अगर एक नेशनल चैनल की ओर से,नेहासिंह राठौर जैसी एक सुप्रसिद्ध सम्मानित सृजनशील भोजपुरी लोकगीत गायिका (असंदिग्ध)के साथ ऐसा अमान्य तथा अमानवीय मानसिक-प्रताड़नाभरा र्दुव्यवहार किया जा सकता है,तो अन्य सामान्य नागरिकों की स्थिति क्या होगी?
मानवाधिकार उलॅंघनों पर निरंतर-चिरंतर चर्चारत रहने वाले वीर-बालक चुप क्यों हैं?
अभिव्यक्ति की व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वतंत्रता के शंकराचार्य चुप क्यों हैं?
महिलाओं के आत्मसम्मान को संरक्षण प्रदान करने वाले महिला-मुक्ति के स्वनामधन्य पक्षधर यौद्धा चुप क्यों हैं?
धड़धड़ाते हुए हर कहीं अपनी झोली फैलाकर हाज़िरी बजाने वाला दुर्लभ फ़ैशनपरस्त महिला-आयोग चुप क्यों है?
ख़ैर,वे बहुत सारे हैं,जो बहुत सारे अन्याय-विरूद्ध चुप हैं और एक अकेली नेहासिंह राठौर को,कौरव-पांडव सभा में,द्रौपदी-सम अपमानित किया जा रहा है!
सवाल है कि इस समय इस प्रकरण के संदर्भ-समाधान हेतु सक्षमतौर पर क्या किया जा सकता है अथवा क्या किया जाना चाहिए?
महिला-आयोग को चाहिए कि वे ABP के ख़िलाफ़ तुरंत पुलिस में प्राथमिकी दर्ज़ करवाऍ और देशभर में विभिन्न स्तरों पर विरोध-प्रदर्शन भी करें.
ABP न्यूज़ चैनल का लाइसेंस ( दिनभर क्षमा-याचना प्रसारण करवाते हुए )तत्काल प्रभाव से हमेशा-हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाना चाहिए.
पुनश्च:
एबीपी न्यूज़ चैनल ने संबंधित तीनों पत्रकारों को निकाल दिया है.ख़बर ये भी है कि मूल रूप से ये विवादास्पद ख़बर,जिस महिला पत्रकार ने तैयार की थी,वह एक फर्ज़ी वीडियो के झाॅंसे में आ गई थी.
लेकिन इससे उसका अपराध कम नहीं हो जाता है.वरिष्ठों ने भी या तो ख़बर को क्राॅस चेक नहीं किया या कि फिर किसी दबाव में आकर,जान-बूझकर,जस का तस जाने दिया.ये नीतिगत सवाल अभी साफ़ नहीं हुआ है.
कारण जो भी रहे हों या जो भी हो सकते हों,ये महिला-विरोधी अपराध अक्षम्य है.किसी को भी,किसी के भी चरित्र-हनन का अधिकार नहीं है.
वैसे ख़बर एबीपी के मुख्य चैनल पर नहीं,उसके पोर्टल पर थी.इसके लिए चैनल पर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए.ज़्यादातर लोगों को इसका पता तभी चला,जब नेहासिंह राठौर ने सोशल मीडिया पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी
