Blogसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

बदलाव की राह तलाशतीं हरियाणवी गज़लें

पुस्तक समीक्षा बदलाव की राह तलाशतीं हरियाणवी गज़लें ‘खड़तल कहणा ओक्खा सै’ में बेमिसाल है शायर मंगतराम शास्त्री की बेबाकी…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसमय /समाज

सरला माहेश्वरी की कविता – तदात्मानं सृजाम्यहम् !

रवीश कुमार के जन्मदिन पर राजनेता और कवयित्री सरला माहेश्वरी ने  एक संदेश के साथ कविता लिखी है।  यह कविता…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांत

मुनेश त्यागी की कविता- मुझे अच्छे लगते हैं

कविता मुझे अच्छे लगते हैं… मुनेश त्यागी   ज्ञान न्याय, क्रांति शिक्षा।   दोस्ती समता, विज्ञान जनतंत्र।   गणतंत्र बराबरी,…