डॉ रणबीर दहिया की एक कविता

डॉ रणबीर दहिया की एक कविता

भ्रष्टाचार हमको शिखर ऊपर चढ़ाना ना चाहिये
देश का नाश करे वो व्यापार बढ़ाना ना चाहिये
राजनीति को ढाए ऐसा भ्रष्टाचार फैलाना ना चाहिये
सब पर रोब जमाए ऐसा थानेदार बिठाना ना चाहिये
कविता डॉ रणबीर दहिया भ्रष्टाचार व्यापार

महंगा पन रोजाना हमको देखो बढ़ाना ना चाहिये
यो भ्रष्टाचार शिखर के ऊपर चढ़ाना ना चाहिये
धोखा व्यापार कभी भी उकसाना ना चाहिये
इन्सानियत को कभी देखो भुलाना ना चाहिये
औछा पन हमें कभी भी खिंडाना ना चाहिये

संविधान देश का कभी भी भुलाना ना चाहिये
जालसाज पाप कर्म कभी अपनाना ना चाहिये
भाईचारा आपस का कभी तुड़‌वाना ना चाहिये
कमेरे को बिल्कुल हमको बहकाना ना चाहिये

मेहनतकश को कभी भी तड़‌फाना ना चाहिये
जनतन्त्र का मजाक बिल्कुल उडाना ना चाहिये
सवाल करने वाले को कभी डराना ना चाहिये
नौजवान को आज नशा पता कराना ना चाहिये

समाज के अन्दर चौड़ी खाई खुदाना ना चाहिये
भ्रष्टाचार हमको शिखर ऊपर चढ़ाना ना चाहिये
देश का नाश करे वो व्यापार बढ़ाना ना चाहिये
राजनीति को ढाए ऐसा भ्रष्टाचार फैलाना ना चाहिये

सब पर रोब जमाए ऐसा थानेदार बिठाना ना चाहिये
लिंग भेज जो बढ़ाए ऐसा उपचार बताना ना चाहिये
गरीबी की जो बढ़ाए ऐसा संसार रचाना ना चाहिये
औरतों के हकों पर हाहाकार मचाना ना चाहिये

भाईचारे को तोड़े ऐसा व्यवहार दिखाना ना चाहिये

बहुविविधता देश की पे तलवार चलाना ना चाहिये
सबका देश हमारा देश ये प्रचार दबाना ना चाहिये
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