डेरावाद और बाबावाद वैज्ञानिक चेतना के लिए बड़ा खतरा: प्रो. गौहर रज़ा

बरनाला में प्रगतिशील साहित्य की रोशनी बिखेरता तीन दिवसीय पुस्तक मेला संपन्न

डेरावाद और बाबावाद वैज्ञानिक चेतना के लिए बड़ा खतरा: प्रो. गौहर रज़ा

पुस्तक मेले में नाटक ‘सुकरात’ और ‘ठग्गी’ का हुआ सफल मंचन

बरनाला। डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की याद में स्थानीय तर्कशील भवन में चल रहे तीन दिवसीय पुस्तक मेले के अंतिम दिन रविवार को दिन भर विचार-चर्चा, इंकलाबी गायन और नाटकों का प्रकाश बिखरता रहा।

प्रथम सत्र में प्रसिद्ध वैज्ञानिक और कवि डॉ. गौहर रज़ा ने ‘वर्तमान दौर में वैज्ञानिक सोच के समक्ष चुनौतियाँ और हमारे कार्य’ विषय पर अर्थपूर्ण संवाद प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि देश में इस समय वैज्ञानिक विचारधारा के लिए मुख्य खतरा उन सांप्रदायिक-फासीवादी ताकतों से है, जो शैक्षणिक संस्थानों का भगवाकरण, व्यापारीकरण और निजीकरण करके अंधविश्वास फैलाने में लगी हुई हैं। इसके कारण देश में डेरावाद, बाबावाद और अज्ञानता का धंधा फल-फूल रहा है, जिसे हराने के लिए वैज्ञानिक चेतना की मशाल को हर दरवाजे तक ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने पुस्तक मेले को एक उत्कृष्ट कार्य बताते हुए कहा कि लोक-पक्षधर साहित्य की समाज को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

वर्तमान दौर में वैज्ञानिक सोच के समक्ष चुनौतियाँ और हमारे कार्य विषय पर संबोधित करते हुए प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. गौहर रज़ा

धर्मिंदर मसानी ने गाए इंकलाबी गीत

इससे पहले, जाने-माने जनवादी गायक धर्मिंदर मसानी ने अवतार सिंह पाश, संत राम उदासी और महिंदर साथी के लिखे गीतों को अपनी बुलंद आवाज़ में गाकर माहौल को इंकलाबी रंग में रंग दिया।

केवल ढिल्लों और बूटा सिंह महमूदपुर  द्वारा मानवाधिकारों पर अनुदित पुस्तकों का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान तर्कशील आंदोलन पर कंवल ढिल्लों और बूटा सिंह महमूदपुर द्वारा मानवाधिकारों पर अनुवादित पुस्तकें रिलीज़ की गईं। समारोह में प्रसिद्ध नाटककार कीर्ति कृपाल के निर्देशन में ‘नाट्यम पंजाब’ द्वारा नाटक ‘सुकरात’ और ‘चंडीगढ़ स्कूल ऑफ ड्रामा’ की टीम द्वारा एकत्र सिंह के निर्देशन में ‘ठग्गी’ नाटक का सफल मंचन किया गया।
इस अवसर पर राज्य संगठनात्मक प्रमुख मास्टर राजिंदर भदौड़ ने पुस्तक मेले की सफलता के लिए आए हुए अतिथियों, श्रोताओं और पाठकों का धन्यवाद करते हुए हर साल यह पुस्तक मेला आयोजित करने का आश्वासन दिया।

दाभोलकर के हत्यारे की सजा रद करने और मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार करने की मांग

समारोह में पारित एक प्रस्ताव के माध्यम से डॉ. नरेंद्र दाभोलकर के हत्यारे सचिन अंधूरे की सजा स्थगित करने और जमानत देने के फैसले को रद्द करने तथा इस हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता वीरेंद्र तावड़े को गिरफ्तार करने की मांग की गई। इसके साथ ही पंजाब में अंधविश्वास विरोधी कानून लागू करने की पुरजोर मांग की गई।

समारोह में राज्य कमेटी नेता राजपाल सिंह, राजेश अकलीआ, गुरप्रीत शहणा, राम स्वरन लखेवाली, सुमीत अमृतसर, जसवंत मोहाली, सुखविंदर बागपुर, जोगिंदर कुल्लेवाल, कुलजीत फाजिल्का, सुरजीत टिब्बा, जसवंत जीरख, जिंदर बागपुर, प्रवीण जंडवाला, परम वेद संगरूर, जसवंत जीरख, बलजिंदर कौर, परमजीत कौर, डॉ. राकेश जिंदल, बिंदर धनौला, जसवीर सोनी, सतपाल सलोह, अजायब जलालआणा, विनोद कुमार, राजिंदर कौर अंबाला, डॉ. तरलोक बंधु, पत्रकार पुरुषोत्तम बल्ली, हरमेश मालड़ी, प्र्रिं. हरिंदर कौर, डॉ. जसबीर औलख, पवन परिंदा, गोपाल काओंके, गुरमीत खरड़, ज्ञान सैदपुरी, हरचंद भिंडर, जगदीश नवांशहर, गुरमीत अंबाला, अनुपम अंबाला, मैडम अनुपमा शर्मा, राजेश बिंद्रा, जयपाल, राम कुमार पटियाला, सुरजीत दौधर, अमीश बागपुर, राजिंदर जंडियाली, इकबाल उदासी, सुखविंदर गोगा, अजीत प्रदेशी, मास्टर जसबीर ,जरनैल धौला,के अलावा बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और जनवादी व लोकतांत्रिक, साहित्यिक संगठनों के नेता व कार्यकर्ता उपस्थित थे।

सुमीत अमृतसर, तर्कशील सोसाइटी पंजाब के राज्य मीडिया प्रमुख की रिपोर्ट

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