सृजनकारों के लिए प्राणवायु बनते नीरज जैन

सृजनकारों के लिए प्राणवायु बनते नीरज जैन

आचार्य अरुण

 

वसीम बरेलवी की शायरी को भारत और सीमाओं से परे, जो अपार लोकप्रियता मिली, वह अभूतपूर्व है। विस्तृत हिंदी और उर्दू की दुनिया प्रोफेसर वसीम बरेलवी की खूबसूरत शायरी और व्यक्तित्व की मुरीद है। पिछले दिनों प्रकाशित 520 पेज का ग्रंथ ‘वसीम बरेलवी : जहां रहेगा रौशनी लुटाएगा’ संकलन प्रकाशित हुआ। संकलन में वसीम बरेलवी के रचनाकर्म, जीवन यात्रा, साक्षात्कार आदि साहित्यिक विधाओं में देश के शीर्ष शायरों, लेखकों और बुद्धिजीवियों की 58 रचनाएं संकलित हैं। डब्ल्यू.बी.एस फाउंडेशन के तत्वावधान में प्रकाशित इस संग्रहणीय अंक के प्रकाशन का श्रेय कंप्यूटर इंजीनियर और साहित्य प्रेमी नीरज जैन को है। निस्संदेह, यह रचना बरेलवी के चाहने वालों के लिए संग्रहणीय है।

नीरज जैन को अपनी चौथी औलाद बताते हुए पुस्तक में वसीम बरेलवी आत्मीयता के साथ लिखते हैं—‘15 जनवरी, 2023 में कार हादसे के बाद नीरज ने मेरी जैसी सेवा की, वैसा कोई आज्ञाकारी बेटा ही कर सकता है। मेरे बच्चे तो बाहर हैं, नीरज जी मेरी सांसों की पहरेदारी का दायित्व संभाले हुए हैं। मेरा रुआं-रुआं उनके और उनके परिवार के लिए दुआगो है। ऐसी निस्वार्थ और समर्पित संतान जिसे मिल जाए वो क्यों न खूबी-ए-किस्मत पे अपनी नाज करे। खुदा इन्हें शाद रखे, आबाद रखे।’

नीरज बताते हैं कि वसीम साहब की शायरी को पढ़ने व सुनने का अनुभव ऐसा है कि जैसे हम एक साथ कबीर, मीर, गालिब और जायसी को पढ़ रहे हों। उनकी रचनाओं में इतनी गहराई और विविधता है कि वे समय व पीढ़ियों की की सीमाओं को पार कर जाती है। वसीम बरेलवी का सानिध्य मिलना मेरी जिंदगी की एक असाधारण घटना थी। मैंने वसीम साहब से बातचीत में महसूस किया कि वे जीवन के जटिल विषयों को कितनी सहजता व सरलता से समझा देते हैं। उनके सानिध्य ने मेरे दृष्टिकोण को इतना सकारात्मक बना दिया कि मेरे जीवन मे अप्रत्याशित और अविश्वसनीय परिवर्तन हुए।

साहित्यकारों व विभिन्न विधाओं में सृजनकारों की नीरज जैन द्वारा मदद का यह पहल किस्सा नहीं है। वे गाहे-बगाहे साहित्यकारों की मदद के लिये आगे आते हैं। कंप्यूटर इंजीनियरिंग जैसे शुष्क विषय के दक्ष इंजीनियर नीरज जैन साहित्य की सरस धारा के साथ लगातार डूबते-उतरते रहते हैं। राष्ट्रीय स्तर के मुशायरे व कवि सम्मेलनों व साहित्यिक संवाद आयोजनों में वे बेहद सक्रिय रहते हैं।

नीरज जैन द्वारा साहित्यकारों की मदद की एक प्रेरणादायक घटना का जिक्र कला-संस्कृति के मर्मज्ञ रचनाकार राजेंद्र शर्मा बताते हैं। श्री राजेंद्र बताते हैं कि 31 मार्च को कथाकार बल्‍लभ डोभाल के 97वें जन्‍मदिन के अवसर पर कवि, लेखक, पत्रकार उनके नोएडा के सेक्‍टर 12 स्थित आवास पर बधाई देने पहुचें तो पत्‍नी और जवान पुत्र के आकस्मिक निधन से दुखी बल्‍लभ डोभाल ने कहा कि मेरा जन्‍मदिन क्‍यों मना रहे हो, मैं तो सरकारी कागजों में मर चुका हॅू।
बल्‍लभ डोभाल की यह बात सुन सभी स्तब्ध रह गये । कथाकार बल्‍लभ डोभाल ने दुखी मन से बताया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत प्रकाशन विभाग उनके दो बाल उपन्‍यास चालीस सालों से प्रकाशित कर रहा है किन्‍तु साल 2018 में प्रकाशन विभाग से उनके पते पर पत्र आया कि उक्‍त दो बाल उपन्यासों की रायल्टी देय है और चूंकि बल्‍लभ डोभाल की मृत्यु हो चुकी है, अत: रायल्टी की धनराशि प्राप्त करने के लिये उनके वारिसान बल्‍लभ डोभाल डेथ सर्टिफिकेट डेथ सर्टिफिकेट और कोर्ट द्वारा प्रमाणित बल्‍लभ जी की वसीयत ( बिल) की प्रति प्रकाशन विभाग को भेज दें ताकि रायल्‍टी का भुगतान किया जा सकें ।

साहित्यकार राजेंद्र शर्मा बताते हैं जीवन भर कहानियां लिखने वाले बल्‍लभ डोभाल प्रकाशन विभाग के इस रवैये से इतने क्षुब्‍ध हुए कि आज तक उस पत्र का जवाब तक नही दिया और प्रकाशन विभाग ने भी इस संबध में आगे कोई कार्यवाही करना मुनासिब नहीं समझा । गौरतलब बात यह है कि प्रकाशन विभाग आज तक भी उनके उपन्‍यास प्रकाशित कर बिक्री कर रहे है ।

कालांतर साहित्यकार राजेंद्र शर्मा ने नीरज जैन को बताया कि उम्र के दसवें दशक में चल रहे डोभाल जी जीवट के धनी हैं, पर अब वह पहले की भाँति चल – फिर नहीं सकते, ऐसी स्थिति में समाज और संस्थाओं को आगे आकर रचनाकारों का ख्याल रखना चाहिए।

घटना से गहरे आहत नीरज जैन ने महसूस किया कि यह सूचना भयावह है । बल्‍लभ डोभाल जी की साहित्य के क्षेत्र में व्यापक प्रतिष्ठा है। उनकी कहानियां प्रेमचंद के पुत्र और ’कहानी पत्रिका’ के संपादक श्रीपतराय प्रमुखता से प्रकाशित करते रहे। आखिर कैसे कोई संस्थान कैसे जीते जी किसी रचनाकार को मृत घोषित कर सकता है। निश्चय ही यह प्रकाशन विभाग की सवेंदनहीनता की पराकाष्‍ठा है ।

इस घटना ने नीरज जैन को उद्वेलित किया। वे बल्लभ डोभाल के घर पहुंचे और जीवनोपयोगी वस्तुओं के साथ उनकी आर्थिक मदद की। उन्होंने प्रतिमाह उन्हें आर्थिक मदद देने की वायदा किया। विडंबना यह है कि डोभाल जी के पास एटीएम कार्ड व बैंक सुविधा नहीं है। अतः नीरज जैन ने हर माह उनकी मदद के लिये उनके पास जाने का फैसला किया। वे नियमित रूप से खाने पीने व अन्य जीवन उपयोगी वस्तुएं देने उनके घर जाते हैं।

साहित्यिक आयोजनों और साहित्यकारों की मदद के लिये नीरज जैन ने डब्ल्यू.बी.एस फाउंडेशन की स्थापना की। संस्था का उद्देश्य भारतीय कला,साहित्य व संस्कृति को बढ़ावा देना है। साथ ही शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में उच्चतम मूल्यों का पालन करते हुए योगदान देने की कोशिश करना है।

27 अक्तूबर 1977 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के गांव कुरालसी में जन्मे नीरज जैन को पिता बिजेंद्र जैन व माता श्रीमती सावित्री जैन ने उच्च संस्कार व शिक्षा दी। दादा शिखर चंद जैन के आदर्शों ने उनके जीवन को नई दिशा दी। उ.प्र के बुढ़ाना व बड़ौत से प्रारंभिक पढ़ाई के बाद कंप्यूटर इंजीनियरिंग मे दक्षता के लिए एशिया के पहले इंजीनियरिंग संस्थान रुड़की वि.वि( अब आईआईटी रुड़की) व बिट्स पिलानी से एमसीए व एमएस में डिग्री हासिल की। फिर भारत सरकार के नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर में कंसल्टेंट के पद पर काम करते हुए परिवहन प्रोजेक्टों में क्रांतिकारी बदलाव लाए।

जैन जीवन दर्शन के अनुरूप परोपकार व साहित्य के प्रति गहरा अनुराग उनका विशिष्ट गुण हैं। डब्ल्यू.बी.एस के मंच के जरिये विभिन्न सेवा प्रकल्पों में योगदान के अलावा वे अन्य सामाजिक व साहित्यिक गतिविधियों में लगातार योगदान देते हैं। बचपन से ही पढ़ने लिखने के संस्कारों ने उनकी साहित्यिक अभिरुचि को संबल दिया।

पिछले दिनों दिल्ली मे ‘एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स एंड लिटरेचर’का मासिक कार्यक्रम ‘डायलॉग’ को डब्ल्यूबीएस फाउंडेशन का रचनात्मक साथ मिला। गत 26 अप्रैल की शाम एक विशेष गरिमा में ढल गई। जिसने राजधानी के कला जगत को एक सूत्र में पिरोया, बल्कि संवाद और संवेदना की नई जमीन भी तैयार की। पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की पत्नी श्रीमती गुरुशरण कौर ने अपनी गरिमामय उपस्थिति से आयोजन को विशिष्ट आयाम दिया। उन्होंने डब्ल्यूबीएस फाउंडेशन की ओर से पंजाबी साहित्य की मशहूर लेखिका पद्मश्री अजीत कौर और समकालीन चित्रकला की सशक्त हस्ताक्षर अर्पणा कौर को सम्मानित किया। डब्ल्यूबीएस फाउंडेशन के महासचिव नीरज जैन ने इस मंच को नई ऊर्जा और रचनात्मक दिशा दी है।

सृजन व सेवा के माध्यम से साहित्यकारों के जीवन व समाज कल्याण में जुटे नीरज जैन के प्रयास निस्संदेह अनुकरणीय हैं। वे अपनी रचनाओं में समय की सूक्ष्म अनुभूतियों को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
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