लेखकों ने कहा- धरना, प्रदर्शन छात्रों, नौजवानों का बुनियादी अधिकार
जनवादी लेखक संघ मेरठ ने जिलाधिकारी के जरिये राष्ट्रपति को भेजा मांगों का ज्ञापन
आज जनवादी लेखक संघ मेरठ द्वारा भारत की राष्ट्रपति महोदया को एक ज्ञापन जिलाधिकारी मेरठ के माध्यम से दिया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि लेखक और कलाकार किसी भी शांतिपूर्ण विरोध की उपेक्षा नहीं कर सकते। हम पूरी तरह से जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों, नौजवानों के आंदोलन के साथ हैं। सम्मान पूर्ण जीवन, सबको शिक्षा, सबको काम और आधुनिक शिक्षा समस्त छात्रों नौजवानों का बुनियादी अधिकार है।
वर्तमान हालात इतने ज्यादा खराब हो गए हैं कि शोषण, जुल्म, अन्याय, गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस जन विरोधी व्यवस्था सामाजिक आर्थिक राजनीतिक में, क्रांतिकारी वैज्ञानिक समाजवादी परिवर्तन किए बिना, जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता है।
वर्तमान में हमारी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था बुरी तरह से भ्रष्टाचार की शिकायत हो शिकार हो गई हैं। पिछले 10 वर्षों में 90 से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हो गए हैं जिनमें करोड़ों युवा, छात्र और उनके परिवारजन प्रभावित हुए हैं। 22 से ज्यादा छात्रों ने सदमे में अपनी जान दे दी है मगर असंवेदनशील, सांप्रदायिक और निरंकुश, वर्तमान मोदी सरकार कुछ भी सुनने करने को तैयार नहीं है।
यह सरकार छात्रों, नौजवानों, किसानों, मजदूरों की जायज मांगों को मानने के लिए भी तैयार नहीं है। हालात इतने खराब होते जा रहे हैं कि किसान आंदोलन की तरह, यह सरकार छात्रों नौजवानों के वर्तमान आंदोलन को भी तोड़ने और असफल करन पर उतर आई है।
महान लेखक प्रेमचंद ने कहा था कि लेखक, कलाकार और कविगण समाज में हो रहे आंदोलनों, हलचलों और क्रांतियों से बेखबर नहीं रह सकते।
जनवादी लेखक संघ मेरठ इकाई पूरी तरह से छात्रों नौजवानों के इस आंदोलन की मांगों का पूरी तरह से समर्थन करती है। सरकार बिना देरी किए और बिना मनमानी के उनकी मांगों को सुने और उनका समुचित समाधान करें और उन्हें धरना प्रदर्शन करने का पूरा मौका दे।
हमारी मांगे इस प्रकार हैं…
1.शिक्षा और परीक्षाओं की कमियों को बिना देरी किए सुधारा जाए,
2. सबको मुफ्त और आधुनिक शिक्षा दी जाए,
3. शिक्षा का निजीकरण और सांम्प्र्दायिकरण तुरंत बंद किया जाए,
4. सभी नौजवानों को अनिवार्य रोजगार दिया जाए,
5. धरना प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकारों पर लगाई गई रोक तुरंत हटाई जाए,
6. खाली पड़े हुए हजारों शिक्षक पदों पर बिना देरी और बहानेबाजी किये ही, तुरंत योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, 7. स्कूलों, कालेजों और विश्वविद्यालयों को मनमाने रूप से तोड़ने, गिराने की चलायी जा रही मुहिम पर तुरंत रोक लगाई जाए।
ज्ञापन देने वालों में मुनेश त्यागी, मंगल सिंह मंगल, धर्मपाल सिंह मित्रा और महकार सिंह शामिल थे।
