जयपाल की कविता – आओ लिखें

कविता

आओ लिखें

जयपाल

 

उन हाथों के लिए
जो ज़ंजीरों में जकड़े हैं
लेकिन प्रतिरोध में उठते हैं

उन पैरों के लिए
जो महाजन के पास गिरवी हैं
लेकिन जलूस में शामिल हैं

उन आंखों के लिए
जो फोड़ दी गई हैं
लेकिन सपने देखती हैं

उस ज़ुबान के लिए
जो काट दी गई है
लेकिन बेज़ुबान नहीं हुई

उन होठों के लिए
जो सील दिए गए हैं
लेकिन फड़फड़ाना नहीं भूले

उस सिर के लिए
जो कट तो गया
पैरों में नहीं गिरा

उस दिल के लिए
जो टूटता भी रहा
धड़कता भी रहा

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