कविता
रैस्टरूम में स्टूडेंट्स
हरदीप सबरवाल
पहले पीरियड में ही
बुझे चेहरे के साथ, लाचार हो
पहुंच जाते, हाजिरी लेते
कक्षा अध्यापक के पास
अचानक किसी का सरदर्द, पेट दर्द
किसी को लगता
आने वाली है उल्टी
मौसम के थपेड़ों से त्रस्त
अपने साथी से कह
स्लिप बनवा, क्लास इंचार्ज के दस्तखत करवा
टिफिन , वाटर बॉटल उठा
पहुंच जाते स्कूल के रैस्टरूम में
अपनी अपनी तकलीफों को
बिस्तर पर लिटा आराम करते
रैस्टरूम में ही कुछ विद्यार्थी
खिड़की से बाहर झांकते
पिकनिक सा आनंद लेते
अगले पीरियड में होने वाले
क्लास टेस्ट से बचते
बचते गृह कार्य न करने की डांट से
रैस्ट रूम में विद्यार्थी, कितनी बार
व्यवस्था को धता बता
नादान उम्र में ही
उसके लूपहोल पर हंसते खिलखिलाते…
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