लघुकथा
सही पात्र
डॉ रीटा अरोड़ा
“माँ, मैं रोहित के लिए हर समय तैयार रहता हूँ, फिर भी वह मेरी कद्र नहीं करता,” आरव उदास होकर बोला।
माँ ने मुस्कुराकर पूछा, “तुम उसे क्या-क्या देते हो?”
“अपना समय, भरोसा, मदद और पूरा साथ।”
माँ उसे आँगन में ले गईं। वहाँ एक टूटा हुआ घड़ा रखा था।
उन्होंने उसमें पानी डाला। कुछ ही क्षणों में पानी दरारों से बहने लगा।
आरव बोला, “माँ, इसमें कितना भी पानी डालो, सब व्यर्थ जाएगा।”
माँ ने कहा, “बिल्कुल बेटा। कुछ लोग भी ऐसे ही होते हैं। उन्हें कितना भी प्रेम, विश्वास और सम्मान दो, वे उसकी कीमत नहीं समझते।”
“तो क्या मुझे देना बंद कर देना चाहिए?” आरव ने पूछा।
माँ ने कोई उत्तर नहीं दिया। बस खाली होते घड़े को देखती रहीं।
आरव भी बहते पानी को देर तक निहारता रहा।
उसी समय रोहित का संदेश आया-
*”यार, एक और मदद चाहिए…
आरव ने मोबाइल की स्क्रीन देखी, फिर उस टूटे हुए घड़े की ओर देखा।
कुछ प्रश्नों के उत्तर शब्दों में नहीं, दृश्य दे जाते हैं।
