हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-129
जयपाल गुढ़ा – झज्जर से राज्य तक संघर्ष में सक्रिय रहे
सत्यपाल सिवाच
जयपाल गुढ़ा का जन्म 4 अप्रैल 1965 को झज्जर के गाँव गुढ़ा में एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी माँ ढोबन और पिता श्री अमर सिंह कृषि कार्य से अपना निर्वाह करते थे। उनकी माता जी वैज्ञानिक मानसिकता की पक्षधर थीं तो पत्नी आध्यात्मिक विचारों की हैं। पिताजी का साया डेढ़ साल की आयु में ही सिर से उठ गया था। वे पाँच भाई और एक बहन हैं। दो पुत्र हैं, एक बी-टेक करके प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं तो दूसरा विदेश में अध्ययनरत है। जयपाल ने दसवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है।
गुढ़ा में संघर्ष की भावना बचपन से ही भरी हुई थी। दसवीं कक्षा पास करते ही हायर सेकंडरी तथा डीवाईएफआई ज्वाइन की। सन् 1984 से 1988 तक डीवाईएफआई के रोहतक और भिवानी के संयुक्त उपाध्यक्ष रहे। 1986 में सर्व कर्मचारी संघ का गठन हुआ तथा 1987 में नौकरी में आने से पहले ही सर्व कर्मचारी संघ के वेतन आयोग के लिए किए गए आंदोलन में गिरफ्तारी दी। सन् 1988 में मैकेनिकल विभाग में ज्वाइन किया,1989 में सर्व कर्मचारी संघ के खंड प्रचार सचिव नियुक्त किए गए। सन् 1997 में जिला बनने पर लगातार तीन योजना सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव रहे। इसके बाद मैकेनिकल 41 राज्य आडिटर दो योजना, एक संयुक्त सचिव,एक योजना उपप्रधान, दिसंबर 2021 से मार्च 2025 तक राज्य प्रधान तथा वर्तमान में राज्य चैयरमेन हैं।
वे 01 नवंबर 1988 को जनस्वास्थ्य विभाग में “की-मैन” के रूप में सेवा में आए और 30 अप्रैल 2023 को पम्प चालक ग्रेड -1 पद से सेवानिवृत्त हुए। जब वे नौकरी में आए तो मैकेनिकल वर्कर्स यूनियन और सर्वकर्मचारी संघ का रुतबा कायम हो चुका था। इस प्रकार सहज ढंग वे अपनी यूनियन व सामूहिक आन्दोलन में भाग लेने लगे। जब व्यक्तिवादी कार्यप्रणाली को लेकर संगठन में मतभेद आए तो उन्होंने प्रगतिशील व जनवादी पक्ष के साथ खड़ा रहने को प्राथमिकता दी।
वे मैकेनिकल वर्करज यूनियन में जिले के प्रधान, राज्य के उपप्रधान और 2021-24 तक राज्य प्रधान रहे। इसके अलावा वे झज्जर में सर्वकर्मचारी संघ में पदाधिकारी रहे और केन्द्रीय कमेटी के सदस्य भी रहे। संघर्षों के दौरान वे कई बार गिरफ्तार हुए। एक बार बर्खास्त किए गए। समझौता होने के बाद उत्पीड़न की कार्रवाइयां समाप्त हो गई।
कर्मचारियों के संघर्षों के अलावा जयपाल गुढ़ा झज्जर में जनवादी आन्दोलन में भी सक्रियता से भाग लेते रहे हैं। परिवार की ओर से उन्हें आमतौर पर सहयोग मिलता रहा है। इसका मुख्य कारण सब बातें घर पर साझा करते रहे हैं।
झज्जर में तैनात रहे आईएएस या आईपीएस अधिकारियों से भी संपर्क रहा। इनके अलावा वरिष्ठ आईएएस टीवीएसएन प्रसाद जी से जानकारी रही है। उन्होंने किसी से संपर्क का निजी लाभ नहीं उठाया। सेवानिवृत्ति से दो महीने पहले बड़ी दुर्घटना के शिकार हो गए थे। उनकी हालत को देखकर, उनकी रिकवरी बड़ी मुश्किल प्रतीत हो रही थी, लेकिन मन की प्रबलता से रिकवरी हुई तथा सेवानिवृत्ति के बाद हर सामाजिक आंदोलनों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।

लेखक – सत्यपाल सिवाच
