कालजयी साहित्यिक कृतियां और धार्मिक आस्था
अरुण माहेश्वरी

आज के ‘टेलिग्राफ़’ में न्यूयार्क टाइम्स की एक ख़बर छपी है जिसमें बताया गया है कि मिस्र में हाल में खोजी गई एक ममी के साथ होमर के क्लासिक “इलियड” की एक प्रति भी दफ़्न मिली है जो प्राचीन मिस्र के ख़ास पेपाइरस कागज पर लिखी हुई है ।

लगभग 2,000 वर्ष पुरानी इस ममी की पट्टियों के बाहर मिट्टी के एक छोटे से पैकेट में इलियड का एक अंश सील करके रखा गया था। यह पहली बार है जब किसी साहित्यिक कृति को ममीकरण की प्रक्रिया में एक आध्यात्मिक भूमिका में पाया गया है।
जाहिर है कि यह होमर के महाकाव्य और मिस्री धार्मिक अंतिम-संस्कार के बीच एक अद्भुत योग पर प्रकाश डालता है । यह तत्कालीन मिस्र के धार्मिक अनुष्ठानों तक में यूनानी संस्कृति के प्रभाव को दर्शाता है ।
अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके पास पहले से ऐसे प्रमाण थे कि यूनानी साहित्यिक ग्रंथों का प्रयोग मिस्र में जादुई ताबीज़ों के रूप में किया जाता था, और होमर का उल्लेख तथाकथित ‘ग्रीको-मिस्री सूत्र-संग्रहों’ में बार-बार मिलता है। लेकिन इसके पहले इस बात के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले थे । इस नई खोज ने ग्रीको-मिस्र मिथकीय साझा सांस्कृति की पुष्टि की है।
न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह खोज इस बात का संकेत देती है कि रोमन-युगीन मिस्र के लोगों के लिए ‘इलियड’ विशेष रूप से उसके दूसरे खंड “जहाज़ों का अनुक्रम”(Catalogue of Ships) की कुछ पंक्तियाँ परलोक की यात्रा में शायद किसी जादुई मंत्र जितनी ही महत्त्वपूर्ण थीं।
यह ममी, जो किसी गैर-राजकीय पुरुष की थी, बार्सिलोना विश्वविद्यालय के अभियान द्वारा ऑक्सिरिन्खस (Oxyrhynchus) नामक दफ़न-स्थल पर खोजी गई। यह परियोजना विश्वविद्यालय के “इंस्टीट्यूट ऑफ़ एंशिएंट नियर ईस्ट” के इग्नासी-ज़ेवियर अडीगो के निर्देशन में चल रही थी।
होमर के महाकाव्य के धार्मिक महत्व को उजागर करने वाली यह घटना भारत में गीता और रामायण जैसी कालजयी कृतियों के धार्मिक महत्व की परिघटना पर भी प्रकाश डालती है ।
साहित्यिक कृतियाँ हर युग में बार-बार खुद को नाना रूपों में प्रकट करने वाले शाश्वत सत्य की सर्वकालिक अभिव्यक्तियाँ होती हैं जिनका मनुष्यों की आस्था का विषय बन जाना आश्चर्यजनक नहीं होता । अरुण माहेश्वरी के फेसबुक वॉल से साभार
