युद्ध के विरुद्ध युद्ध-13
कविता हमेशा युद्ध के खिलाफ़ खड़ी रही है, भले ही तानाशाह युद्ध को राष्ट्रवादी गौरव बताकर उसका महिमामंडन करते रहे हों। लेकिन उसकी कीमत आम आदमी ने ही चुकाई है (महमूद दरवेश)। बहरहाल जो युद्ध चल रहे हैं उनके नकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहे हैं । किसी भी युद्ध में जहां बच्चे और महिलाओं समेत नरसंहार होते हैं, वहीं इस विध्वंस से अंतरराष्ट्रीय सामाजिक जीवन भी तहस-नहस होता है।
प्रतिबिंब मीडिया साहित्यकारों की इस चिंता से भली-भांति वाकिफ़ है। ‘युद्ध के विरुद्ध युद्ध’ शीर्षक के तहत हम आपका युद्ध विरोधी साहित्य प्रकाशित करेंगे। आप अपनी कविताएं, कहानियों समेत रचनाएं हमें भेजिए, उन्हें प्रतिबिंब मीडिया पर ससम्मान प्रकाशित किया जाएगा। इस कड़ी में हमने कई महत्वपूर्ण कवियों की रचनाएं प्रकाशित की हैं। परंतु अब जो गीत प्रकाशित कर रहे हैं इसने पूरी दुनिया में तहलका मचा रखा है। न तो इसके लेखक के बारे में पता है और न ही गायिका के बारे में। लेकिन यह इजराइल और अमेरिका के खिलाफ गीत है और इसमें कहा गया है कि इस युद्ध को तुम दोनों अपने पास ही रखो। प्रस्तुत है गीत ऐ अमेरिका ! ऐ इजराइल ! इस अंग्रेजी गीत का हिंदी मेंअनुवाद कर प्रतिबिम्ब मीडिया के पाठकों तक पहुंचाया है दीपक वोहरा जी ने। प्रतिबिम्ब मीडिया की तरफ से उनका आभार प्रदर्शित करते हुए यहां यह गीत दिया जा रहा है। हिंदी अनुवाद के बाद अंग्रेजी मूल गीत को भी दिया जा रहा है। संपादक
ऐ अमेरिका! ऐ इज़राइल !
ऐ अमेरिका, अपने बम अपने पास रख,
हमारी जमीं से दूर रह।
यह हमारा मुल्क है,
आज़ादी हमारे हाथों में है।
हमें तुम्हारे बम नहीं चाहिए,
अपना ज़हर, अपनी गंदगी ले जाओ
और दफा हो जाओ।
ऐ इज़राइल, तुम आज़ाद नहीं हो,
तुम गुलाम हो, इंसानियत के दुश्मन हो।
तुम्हारा कोई इज्ज़त नहीं, कोई गरिमा नहीं,
तुम लोगों के हत्यारे हो,
हमें तुम पर भरोसा नहीं है।
न ही हम तुम्हें चाहते हैं।
हमारी मुक्ति हमारे हाथों में है,
अमेरिकी बमों में नहीं।
अपने झूठी कठपुतलियाँ ले जाओ,
अपने पतित शाहों की गंदगी ले जाओ।
हमारी मुक्ति केवल हमारे हाथों में है,
अमेरिकी बमों में नहीं।
कोई साम्राज्य हमें मुक्त नहीं कर सकता,
कोई आक्रमणकारी हमें शांति नहीं दे सकता।
हे इज़राइल, तुम नहीं हो स्वतंत्रता,
तुम गुलामी हो, मानवता के शत्रु हो।
तुम्हारा कोई सम्मान नहीं, कोई गरिमा नहीं,
जन-हत्यारे हो, हम पर विश्वास नहीं।
हमारी मुक्ति हमारे हाथों में है,
अमेरिकी बमों में नहीं।
जिसे तुम मुक्ति कहते हो,
वह आग और विनाश की चादर है।
हे अमेरिका, अपने बम अपने पास रखो,
हमारी जमीं से दूर रहो।
यह हमारी मातृभूमि है,
स्वतंत्रता हमारे हाथों में है।
हमारी मुक्ति हमारे हाथों में है,
अमेरिकी बमों में नहीं।
हमारी मुक्ति हमारे हाथों में है,
अमेरिकी बमों में नहीं।
हमारी मुक्ति हमारे हाथों में है,
अमेरिकी बमों में नहीं।
अनुवाद – दीपक वोहरा
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मूल गीत इस प्रकार है—–
Hey America Hey Israil
(A song against empire)
Hey America, keep your bombs to yourself,
Stay away from our land.
This is our homeland,
And our freedom belongs in our own hands.
We don’t want your democratic bombs,
Take your poison, take your filth, and get out.
Hey Israel, You are not freedom,
You are captivity.
You have no honor,
No dignity,
You are the enemy of humanity,
The murderer of peoples.
We do not trust you,
We do not want you.
Take your lying puppets,
Your fallen shahs, and all your other filth,
And get out.
Our liberation lives only in our own hands,
Not in American bombs.
No empire can free us,
No invader brings us peace.
What you call salvation
Comes dressed in fire and ruin.
Hey America, keep your bombs to yourself,
Stay away from our land.
This is our homeland,
And our freedom belongs in our own hands.
We don’t want your democratic bombs,
Take your poison, take your filth,
And get out.
Our liberation lives in our own hands,
Not in American bombs.
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