हरियाणाः जूझते जुझारू लोग – 104
मास्टर बलबीर सिंह – ताउम्र यूनियन और सामाजिक कार्यों में जुटे रहे
हिसार जिले के गामड़ा निवासी बलबीर सिंह शिक्षक आन्दोलन के ऐसे कार्यकर्ता रहे जिन्हें बिना पद के भी बड़ा नेता माना जाता रहा है। वे वैचारिक और सामाजिक दृष्टि से ऊँचे विचारों के थे। इसीलिए उन्हें कभी संगठन में पद से नहीं, बल्कि एक समझदार और समर्पित नेता होने के कारण सम्मान मिला।
बलबीर सिंह का जन्म 01 जनवरी 1939 को श्री नाथूराम एवं श्रीमती राज कौर के घर हिसार जिले के गांव गामड़ा में हुआ। अपने पांच भाई-बहनों में वे सबसे बड़े थे। उनका विवाह 1956 में श्रीमती धनपति से हुआ। इनकी तीन संताने हैं। मैट्रिक और जेबीटी करने के बाद वे 1961 में सेवा में आए और गांव के पहले अध्यापक बने।
उन्होंने कोठारी शिक्षा आयोग लागू करवाने के संघर्ष से यूनियन में भाग लेना शुरू किया था। सन् 1968 में जनवरी व फरवरी में हुई 3 दिन की हड़ताल में भाग लिया। साथी उजागर सिंह की प्रेरणा से 25 जनवरी 1970 में दिल्ली की रैली में शामिल हुए। 5 अप्रैल 1970 को विधायकों के आवास पर धरने में आदमपुर विधायक के निवास पर शामिल हुए। जिसके चलते इन्हें, मास्टर भरत सिंह और 30 अन्य को सस्पेंड किया गया। 17 दिसंबर 1972 और जनवरी 1973 की रैली में भागीदारी की। 19 फरवरी 1973 से आरंभ हुई हड़ताल में एक महीने तक उत्तरप्रदेश की फतेहगढ़ जेल में कैद रहे। 12 फरवरी 1973 से शुरू हुई हड़ताल में हिस्सेदारी की। सन् 1980 के आंदोलन में साथी सिंह बुड़ैल जेल में रहे। अनेक बार प्रताड़ना में तबादले हुए।
मास्टर बलबीर सिंह की संगठन के तमाम कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी रही तथा जिस दौर में संगठन विकट परिस्थिति से गुजर रहा था उस स्थिति में संगठन के साथ मिलकर उसको आगे बढ़ाने में योगदान दिया। यद्यपि वे मास्टर सोहनलाल के घनिष्ठ सहयोगी रहे, लेकिन सच के पाले में खड़े होने में कोई संकोच नहीं किया। इसी दौर में सर्व कर्मचारी संघ का गठन हुआ जिसमें भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। खंड, जिला व राज्य स्तर के अन्य साथियों को संगठन के लिए प्रेरित पदाधिकारी के रूप में अनेक पदों पर कार्य किया।
साक्षरता के आंदोलन में तथा हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति में भी साथी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नारनौंद पुस्तकालय को शुरू करने में भी बलबीर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एक आंदोलन के शुरुआती दौर के पुरोधा बलबीर सिंह लंबे समय तक बीमारी से जूझते रहे और 14 जनवरी 2022 को 83 साल की उम्र में इस दुनिया को छोड़ कर चले गए। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ एवं हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति का उनके परिवार के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध रहा।
मास्टर बलबीर सिंह जी संपूर्ण जीवन में संघर्षरत रहे। वे मानवता की कल्याण में प्रदेश का हर युवक, नौजवान शिक्षित हो, अंधकार को दूर करने के लिए उन्होंने अथक प्रयास किए। वे केवल एक शिक्षक ही नहीं, समाज सुधारक भी थे। (सौजन्य: ओमसिंह अशफ़ाक)

लेखक : सत्यपाल सिवाच
