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जुल्म की बात ही क्या: काव्य समीक्षा

साहित्य आलोचना के सरोकार जुल्म की बात ही क्या: काव्य समीक्षा मनजीत मानवी के काव्य संग्रह ‘जब कोई दस्तक देता…

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कैंसर के साथ एक मुठभेड़: आत्म-चिंतन

कैंसर के साथ एक मुठभेड़: आत्म-चिंतन मनजीत मानवी कहा जाता है कि जीवन संयोगों से बुना होता है —और कैंसर…