जितेन्द्र धीर की कविता – कविता और जीवन

विश्व कविता दिवस पर विशेष

कविता और जीवन

जितेन्द्र धीर

 

 

कविता

स्वप्न नहीं

एक सच्चाई है

आकाश

इसकी अपरिमित

परिधि की

दृष्टिगत

अविभाज्य भाग

नन्हीं सी ऊँचाई है,

तल- अतल

गिरि, गह्वर,उदधि

सभी कुछ

मात्र उपादान है इसके

माटी की

सोंधी गन्ध से

बारूद की

जलती गंध तक

अंकुरित होते

पौधों से

पर्वत के

उत्तुंग शिखर तक

श्वासों की

धड़कन से

लहरों के कंपन तक

निनादित

स्वर लहरियों का

मौन शब्द

मूक भावनाओं की

प्रतिध्वनि,

ओर से छोर तक

निशा से भोर तक

अनन्त से

अंत तक

शाश्वत चिरंतन है

कविता है

जीवन है।

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