अमेरिकी टैरिफ और भारत की प्रतिक्रिया का एक विश्लेषण

ओमप्रकाश तिवारी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित दुनिया के कई देशों पर टैरिफ लगाया है। किसी पर कम किसी पर ज़्यादा। भारत में ज़्यादात् तर की प्रतिक्रिया है कि इसका ख़ास असर भारत पर नहीं पड़ेगा।

ये ख़ास क्या होता है?

ख़ास कुछ नहीं होता। इसका मतलब है कि असर पड़ेगा। यदि निर्यातक पर पड़ेगा तो उत्पादक पर भी पड़ेगा। उत्पादक पर पड़ेगा तो उत्पादन में लगे लोगों पर भी इसका असर पड़ेगा।

अमेरिका को निर्यात करने वाले एक निर्यातक का कहना है कि अमेरिकी खरीदार आर्डर कैंसिल करने की बात कह रहे हैं। आधा टैरिफ का भुगतान करने की बात कही जा रही है।

इसका मतलब यह है कि जो 27 फीसदी टैरिफ लगाया गया है उसकी भरपाई भारत का निर्यातक करे। अभी आधे की बात कही जा रही है। कल को पूरा टैरिफ ही निर्यातक को देना पड़ा तो? इससे अमेरिकी नागरिकों को उत्पाद उतने में ही मिलेगा और अमेरिका को टैरिफ भी मिलेगा।

इधर निर्यातक को टैरिफ की लागत निकालनी पड़ेगी। वह वस्तु का दाम बढ़ा सकता है। वस्तु का दाम बढ़ने पर आयातक उसे खरीदने से माना कर सकता है। ऐसे में निर्यातक टैरिफ की लागत निकालने के लिए उत्पादन लागत कम करेगा।

उत्पाद का वजन कम कर सकता है। 500 ग्राम की जगह 400 ग्राम का पैक बनाए और दाम पहले वाला ही रखे।

यह भी कर सकता है कि उत्पाद की गुणवत्ता से समझौता करे। 10 मज़दूर के बजाय आठ मजदूर से काम लेने लगे और मज़दूरी यानी वेतन भी कम कर दिया जाय। उत्पादन लागत कम करने के लिए यही तरीका अपनाया भी जाता है। इसलिए इसी की आशंका ज़्यादा है।

ऐसा किया गया तो निर्यात पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन देश में बेरोजगारी बढ़ेगी। मजदूरी कम होने से आमदनी कम होगी तो असमानता और ग़रीबी बढ़ेगी। आमदनी कम होगी तो क्रय क्षमता कम होगी। इसका असर यह होगा कि लोग कम उपभोग करेंगे। इसके लिए कम खरीदारी करेंगे। इस तरह देश में उत्पाद कम बिकेंगे। इससे उत्पादन प्रभावित होगा। इससे अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और आर्थिक मंदी की मार झेलनी पड़ सकती है।

टैरिफ लगाने से अमेरिका को और उसके नागरिकों को कोई नुकसान नहीं होगा। वह फायदे में रह सकता है। उसे निर्यात करने वाले देश और उनके नागरिक दिक्कत में रहेंगे।

तात्कालिक प्रतिक्रिया चाहे जो हो लेकिन आने वाले समय में यही होगा।

 

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