बामसेफ के अधिवेशन में राष्ट्रीयकरण की हिमायत और निजीकरण का विरोध

 

बामसेफ के अधिवेशन में राष्ट्रीयकरण की हिमायत और निजीकरण का विरोध

कुरुक्षेत्र में आयोजित किया गया वामसेफ का क्लस्टर अधिवेशन

ओमसिंह अशफ़ाक ने उद्घाटन भाषण में राष्ट्रीयकरण की जरूरत पर विस्तार से दी जानकारी

डॉ. अम्बेडकर भवन सेक्टर 8 कुरूक्षेत्र में बामसेफ का क्लस्टर अधिवेशन का आयोजन किया गया। बामसेफ द्वारा इस प्रकार के क्लस्टर अधिवेशन देश के 200 जिलों में आयोजित किये जा रहे हैं। क्लस्टर अधिवेशन के पहले सत्र में चर्चा का विषय राष्ट्रीयकरण का पैगाम- निजीकरण पर लगाम राष्ट्रीयकरण के माध्यम से लोकतांत्रिक राज्य का समाजवाद की ओर बढ़ना ।
प्रथम सत्र का उद्घाटन सामाजिक चिंतक ओम सिंह अशफाक ने किया। मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण लाल दहिया (सेवानिवृत्त एसडीओ, पशुपालन विभाग, हरियाणा), और मंच का संचालन सामाजिक चिंतक मूलनिवासी डॉ. सुषमा (सामाजिक चिंतक) द्वारा किया गया।प्रस्तावना डॉ. संजय कलसन द्वारा रखी गई ।

पहले सत्र की अध्यक्षता बामसेफ के केंद्रीय समिति के कार्यकारिणी सदस्य और पंजाब के प्रभारी मूलनिवासी नितिन थांबल्के ने की। अपने उद्घाटन भाषण में ओम सिंह अशफाक ने राष्ट्रीयकरण की आवश्यकता,अनिवार्यता और इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीयकरण किस प्रकार सामाजिक न्याय और गरीबों के उत्थान के लिए आवश्यक है?
मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण लाल दहिया ने शिक्षा की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शिक्षा के लिए बजट आवंटन से संबंधित आंकड़ों के साथ अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने शिक्षा के बजट में कटौती करने के लिए सरकार की आलोचना की। दहिया ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बिना कोई भी राष्ट्र विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता। डॉ. दहिया ने एक पुस्तिका भी वितरित की जिसमें संक्षेप में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई हैं। प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए नितिन थांबल्के ने संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों, राज्य समाजवाद और डॉ. अंबेडकर द्वारा रचित राज्य और अल्पसंख्यकों पर अपने विचार व्यक्त किए।

विशेष आमंत्रित डॉ.बी.आर.अंबेडकर भवन के अध्यक्ष डॉ. रामभगत लांग्यान ने सामाजिक एकता और शिक्षा के बल पर आगे बढ़ने पर जोर दिया।

दूसरे सत्र का शीर्षक था मूलनिवासी बहुजन संगठनों की एकता- बुनियादी सिद्धांत और कार्यक्रम। इस सत्र की अध्यक्षता मूलनिवासी संघ हरयाणा की राज्य अध्यक्ष मूलनिवासी डॉ.रतन कौर ने की। मंच संचालन मूलनिवासी जितेन्द्र ने किया, विषय की प्रस्तावना जिला कार्यकारिणी सदस्य कुलदीप कुमार ने की।

बहुजन चिंतकों को एक मंच पर लाने पर जोर

दूसरे सत्र में मूलनिवासी बहुजन संगठनों की एकता, बहुजन चिंतक लोगों का एक मंच पर आने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। सभी वक्ताओं ने अपने विचार विस्तारपूर्वक व्यक्त किए। वक्ताओं ने बहुजन समाज की स्थिति के साथ-साथ देश की वर्तमान राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की।

मुख्य वक्ताओं में मूलनिवासी ज़िले सिंह सभरवाल, लीला राम बहमनी, डॉ. प्रेम सिंह, डॉ. रतन कौर, जितेंद्र कुमार, सेवा राम बालू और डॉ. करमवीर टंडन ने अपने विचार रखे। मूलनिवासी सतबीर कुमार कोषाध्यक्ष जिला कुरूक्षेत्र ने आगंतुकों का आभार जताते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *